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प्रश्न
प्रदत्तपदानां समासं कृत्वा समासनाम लिखत-
| विग्र: | समस्तपदम् | नाम |
| धर्मः च अर्थः च | ______ | ______ |
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उत्तर
| विग्र: | समस्तपदम् | नाम |
| धर्मः च अर्थः च | धर्माथौ | द्वंद्व |
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| कामः च मोक्षः च | ______ | ______ |
प्रदत्त-तालिकायां समस्तपदं विग्रहं वा लिखत-
| क्रमः | समस्तपदम् | विग्रहः |
| 1. | निर्मलम् |
______ |
| 2. | ____________ | एकम् एकम् इति |
| 3. | ____________ | दोषाणाम् अभाव: |
| 4. | सव्यवधानम् | ____________ |
| 5. | निरर्थकम् | ____________ |
| 6. | ____________ | चिन्तायाः अभाव: |
| 7. | स्नेहेन सहितम् | ____________ |
| 8. | ____________ | समयम् अनतिक्रम्य |
| 9. | ____________ | गङ्गायाः समीपम् |
| 10. | सहर्षम् | ___________ |
अधोलिखित-तालिकायाम् समस्तपदं विग्रह वा लिख्यन्ताम्-
| क्रमः | समस्तपदानि | विग्रहः |
| 1. | __________ | सप्तानाम् अह्रां समाहारः |
| 2. | पञ्चानां पात्राणां समाहारः | __________ |
| 3. | __________ | त्रयाणां भुवनानां समाहारः |
| 4. | पञ्चरात्रम् | __________ |
| 5. | अष्टाध्यायी | __________ |
समाससविग्रहमणां समासनामाभिः सह मेलनं करुत
| समासविग्रहः | समासनाम | ||
| (1) | विविधानि बीजानि | (अ) | नञ्-तत्पुरुषः। |
| (2) | दिने दिने | (आ) | बहुब्रीहिः। |
| (3) | लगुडं हस्ते यस्य सः | (इ) | कर्मधारयः। |
| (4) | न इच्छा | (ई) | इतरेतर द्वन्द्व :। |
| (5) | चिन्ताया मग्ना | (उ) | अव्ययीभाव:। |
| (6) | कवयः च पण्डिताः च | (ऊ) | सप्तमी-तत्परुषः। |
समासविग्रहं कुरुत

धनधान्यानि -______।
समासविग्रहं कुरुत 
सस्यपूर्णम् - ______
समासविग्रहं कुरुत

अश्मखण्डः - ______
समासविग्रहं कुरुत

मृगशृगालौ - ______
समासविग्रहं कुरुत

नीतिनिपुणः - ______
उदाहरणै: रेखाचित्रं पूरयत समाहारद्वन्द्वः
तालिकां पूरयत
| सामासिकपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
| ______ | चरणाभ्यां विकलः | सप्तमी- तत्पुरुषः । |
तालिकां पूरयत
| सामासिकपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
| मदान्धः | मदेन अन्धः | ______ |
कृति : – समस्तपदान् अन्विष्य वर्तुलम् आलिखत ।
१) क्षुद्रा बुद्धिः यस्य सः ।
२) विशालौ बाहू यस्य सः ।
३) एकः दन्तः यस्य सः ।
४) लब्धा शिक्षा येन सः ।
५) ईश्वरे निष्ठा यस्य सः ।
६) भाले चन्द्रः यस्य सः ।
७) पद्मं हस्ते यस्याः सा ।
८) गजस्य आननम् एव आननं यस्य सः ।
९) विमलम् अम्बु यस्मिन् तत् ।
१०) महान् उदयः यस्य सः ।
समासविग्रहवाक्यानां समासनामभिः मेलनं कुरुत ।
| विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
| चिन्तया आकुलः | पञ्चमी -तत्पुरुषः |
| प्रजाहिते दक्षः | द्वितीया ततयरुषः |
| चोरलुण्ठकेभ्यः भयम् | सप्तमी -तत्पुरुषः |
| विदेशं गमनम् | तृतीया-तत्मुरुष |
समासानां तालिकापूर्ति कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रह: | समासनाम |
| मृगशृगालौ | ......... | इतरेतरद्वन्द्वः |
समासानां तालिकापूर्ति कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रह: | समासनाम |
| सकोपम् | कोपेन सह | ......... |
अधोलिखितवाक्यम् रेखाङ्कितपद समासं विग्रहं वा प्रदत्तविकल्पेभ्य: चित्वा लिखत।
दीन पुत्रे माता कृपया आर्द्रं हृदयं यस्या: सा भवेत्।
समासविग्रहाणां समासनामभि: सह मेलनं कुरुत।
| समासविग्रह: | समासनाम |
| रामस्य अभिषेकः। | इतेतर् द्वन्द्व:। |
| न शक्यम्। | कर्मधारयः। |
| मृगः च शृगाल: च। | षष्ठी तत्पुरुष:। |
| सद्गुणा: एव सत्ति:। | अव्ययीभाव:। |
| महान् भागः यस्य स:। | नञ्-तत्पुरुष:। |
| क्रमम् अनुसृत्य। | बहुव्रीहिः। |
