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प्रश्न
प्रबन्ध के निर्देशन कार्य के महत्त्व के किन्हीं चार बिन्दुओं को समझाइए।
विस्तार में उत्तर
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उत्तर
प्रबन्ध के निर्देशन कार्य का महत्त्व निम्नलिखित चार बिन्दुओं में समझाया जा सकता है:
- कार्रवाई शुरू करना: प्रबन्ध के अन्य कार्य (नियोजन, नियुक्तिकरण आदि) केवल काम के लिए आधार तैयार करते हैं, लेकिन वास्तविक काम ‘निर्देशन’ के माध्यम से ही शुरू होता है। निर्देशन ही वह कार्य है जो कर्मचारियों को उनके कार्यों के प्रति सक्रिय करता है और संसाधनों को गति प्रदान करता है। बिना निर्देशन के, संगठन में कोई भी भौतिक या मानवीय संसाधन परिणाम नहीं दे सकता।
- कर्मचारी प्रयासों का एकीकरण: एक संगठन में अलग-अलग पदों और विभागों पर कई लोग काम करते हैं। निर्देशन यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक व्यक्ति का काम संगठन के सामान्य उद्देश्यों की प्राप्ति की ओर निर्देशित हो। यह व्यक्तिगत प्रयासों को इस तरह जोड़ता है कि सभी कर्मचारी एक टीम के रूप में मिलकर काम करें, जिससे कार्यों में दोहराव या टकराव की संभावना कम हो जाती है।
- अभिप्रेरणा का साधन: निर्देशन केवल आदेश देना नहीं है, बल्कि कर्मचारियों को उनकी पूरी क्षमता से काम करने के लिए प्रोत्साहित करना भी है। एक प्रभावी प्रबंधक कुशल नेतृत्व और अभिप्रेरणा के माध्यम से कर्मचारियों की छिपी हुई प्रतिभा को पहचानता है और उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता है। इससे न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि संगठन की उत्पादकता में भी सुधार होता है।
- संगठन में स्थिरता और संतुलन बनाए रखना: निर्देशन संगठन के भीतर विभिन्न विभागों और समूहों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। चूंकि यह निरंतर मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण की प्रक्रिया है, इसलिए यह संघर्षों को सुलझाने और सहयोग की भावना विकसित करने में सहायक होता है। एक संतुलित संगठन लंबे समय तक बाजार में स्थिर रहता है और विकास करता है।
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