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प्रश्न
पॉली सैकेराइड और डाइसैकेराइड का पाचन कैसे होता है?
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उत्तर
पॉली तथा डाइसैकेराइड्स का पाचन
कार्बोहाइड्रेट्स का पाचन मुखगुहा से ही प्रारम्भ हो जाता है। भोजन में लार मिलती है। लार का pH मान 6.8 होता है। यह भोजन को चिकना तथा निगलने योग्य बनाती है। लार में टायलिन एन्जाइम होता है। यह स्टार्च (पॉलीसैकेराइड) को डाइसैकेराइड (माल्टीस) में बदलता है।
\[\ce{\text{स्टार्च}->[\text{टायलिन}][pH 6.8]\text{माल्टोस}}\]
आमाशय में कार्बोहाइड्रेट का पाचन नहीं होता। अग्न्याशय रस में ऐमाइलेज एन्जाइम होता है। यह स्टार्च या पॉलीसैकेराइड्स को डाइसैकेराइड्स में बदलता है।
\[\ce{\text{स्टार्च}(\text{पॉलीसैकेराइड)} + \text{जल}->[\text{एमाइलेज}][(ph 7.5 - 8.3)] \text{डाइसैकेराइड्स}}\]
क्षुदान्त्र (छोटी आँत) में आंत्रीय रस में पाए जाने वाले कार्बोहाइड्रेट पाचक एन्जाइम्स के निम्नलिखित प्रकार इसके पाचन में सहायक होते हैं
\[\ce{\text{माल्टोस}->[\text{माल्टेज}]\text{ग्लूकोस} + \text{ग्लूकोस}}\]
\[\ce{\text{लैक्टोस}->[\text{लैक्टेज}]\text{ग्लूकोस} + \text{गैलेक्टोस}}\]
\[\ce{\text{सुक्रोस}->[\text{सुक्रेज}]\text{ग्लूकोस} + \text{फ्रक्टोस}}\]
(माल्टोस, लैक्टोस तथा सुक्रोस डाइसैकेराइड्स हैं।)
