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PCl5 अणु में संकरण का वर्णन कीजिए। इसमें अक्षीय आबंध विषुवतीय आबंधों की अपेक्षा अधिक लंबे क्यों होते हैं? - Chemistry (रसायन विज्ञान)

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प्रश्न

PCl5 अणु में संकरण का वर्णन कीजिए। इसमें अक्षीय आबंध विषुवतीय आबंधों की अपेक्षा अधिक लंबे क्यों होते हैं?

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

PCl5 अणु में sp3d-संकरण (sp3d-hybridisation in PCl5 molecule) - फॉस्फोरस परमाणु (Z = 15) की तलस्थ अवस्था इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को नीचे दर्शाया गया है। फॉस्फोरस की आबंध निर्माण परिस्थितियों में 3s कक्षक से एक इलेक्ट्रॉन अयुग्मित होकर रिक्त \[\ce{3d^2_{z}}\] कक्षक में प्रोन्नत हो जाता है। इस प्रकार फॉस्फोरस की उत्तेजित अवस्था के विन्यास को इस प्रकार दर्शाया जा सकता है-


पाँच क्लोरीन परमाणुओं द्वारा प्रदत्त इलेक्ट्रॉन युग्मों द्वारा भरे गए sp3d संकरित कक्षक

इस प्रकार पाँच कक्षक (एक s, तीन p तथा एक d कक्षक) संकरण के लिए उपलब्ध होते हैं। इनके संकरण द्वारा पाँच sp3d संकर कक्षक प्राप्त होते हैं, जो त्रिकोणीय द्वि-पिरामिड के पाँच कोनों की ओर उन्मुख होते हैं, जैसा चित्र में दर्शाया गया है।


PCl5 अणु की त्रिकोणीय द्वि-पिरामिड ज्यामिति

यहाँ यह तथ्य ध्यान देने योग्य है कि त्रिकोणीय द्वि-पिरामिडी ज्यामिति में सभी आबंध कोण बराबर नहीं होते हैं। PCl5 में फॉस्फोरस के पाँच sp3 संकर कक्षक क्लोरीन परमाणुओं के अर्द्ध-पूरित कक्षकों में अतिव्यापन द्वारा पाँच PCl5 सिग्मा-आबंध बनाते हैं। इनमें से तीन P–Cl आबंध एक तल में होते हैं तथा परस्पर 120° का कोण बनाते हैं। इन्हें ‘विषुवतीय आबंध’, (equatorial) कहते हैं। अन्य दो P–CI आबंध क्रमशः विषुवतीय तल के ऊपर और नीचे होते हैं तथा तल से 90° का कोण बनाते हैं। इन्हें अक्षीय आबंध (axial) कहते हैं। चूँकि अक्षीय आबंध इलेक्ट्रॉन युग्मों में विषुवतीय आबंधी-युग्मों से अधिक प्रतिकर्षण अन्योन्यक्रियाएँ होती हैं; अतः ये आबंध विषुवतीय आबंधों से लंबाई में कुछ अधिक तथा प्रबलता में कुछ कम होते हैं। इसके परिणामस्वरूप PCl5 अत्यधिक क्रियाशील होता है।

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संकरण - d-कक्षकों वाले तत्त्वों में संकरण
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