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पाठ में आदर्श निबंध लेखन के विषय में विस्तार से बताया गया है। अब आप सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ का लेख ‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ पढ़िए-

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प्रश्न

पाठ में आदर्श निबंध लेखन के विषय में विस्तार से बताया गया है। अब आप सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ का लेख ‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ पढ़िए-

कृति
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उत्तर

अज्ञेय के लेख ‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ से यह स्पष्ट होता है कि लेखक मुख्यतः अपनी आंतरिक विवशता के कारण लिखता है। लिखने के माध्यम से वह अपने भीतर उठने वाले भावों, अनुभवों और विचारों को पहचानता है तथा उनसे मुक्त होता है। लेखक के अनुसार केवल किसी घटना को जानना पर्याप्त नहीं है; जब वह घटना गहरी अनुभूति बन जाती है, तभी सच्ची रचना जन्म लेती है। उन्होंने हिरोशिमा की घटना का उदाहरण देकर अनुभव और अनुभूति के अंतर को स्पष्ट किया है।

इस लेख से यह भी पता चलता है कि कभी-कभी संपादक का आग्रह, प्रकाशक की माँग या आर्थिक आवश्यकता जैसे बाहरी कारण भी लेखन के लिए प्रेरित कर सकते हैं, पर सच्ची रचना का मूल स्रोत लेखक की भीतरी प्रेरणा होती है।

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अध्याय 2: क्या लिखूँ? - अभ्यास [पृष्ठ ४३]

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एनसीईआरटी Hindi Ganga Class 9
अध्याय 2 क्या लिखूँ?
अभ्यास | Q 1. | पृष्ठ ४३
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