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प्रश्न
नॉनस्टॉइकियोमीट्री क्यूप्रस ऑक्साइड, Cu2O प्रयोगशाला में बनाया जा सकता है। इसमें कॉपर तथा ऑक्सीजन का अनुपात 2 : 1 से कुछ कम है। क्या आप इस तथ्य की व्याख्या कर सकते हैं कि यह पदार्थ p- प्रकार का अर्द्धचालक है?
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उत्तर
Cu2O में Cu तथा O का 2 : 1 से कम अनुपात यह प्रदर्शित करता है कि इसमें धनायनिक रिक्ति के कारण धातु न्यूनता है। धातु न्यून यौगिक धनायन छिद्रों के द्वारा विद्युत चालन करते हैं। अतः p- प्रकार के अर्द्धचालक होते हैं।
संबंधित प्रश्न
जिन आयनिक ठोसों में धातु आधिक्य दोष के कारण ऋणायनिक रिक्तिका होती हैं, वे रंगीन होते हैं। उपयुक्त उदाहरण की सहायता से समझाइए।
वर्ग 14 के तत्त्व को n- प्रकार के अर्द्धचालक में उपयुक्त अशुद्धि द्वारा अपमिश्रित करके रूपान्तरित करना है। यह अशुद्धि किस वर्ग से सम्बन्धित होनी चाहिए?
निम्नलिखित को p-प्रकार या n-प्रकार के अर्धचालकों में वर्गीकृत कीजिए –
ln से डोपित Ge
बैण्ड सिद्धान्त के आधार पर चालक एवं अर्धचालक में क्या अन्तर होता है?
p -प्रकार के अर्धचालक द्वारा उपार्जत आवेश के बारे में निम्नलिखित में से क्या सही है?
सिलिकन से n -प्रकार का अर्धचालक प्राप्त करने के लिए, किस संयोजकता वाले पदार्थ को इसमें अपमिश्रित करना चाहिए?
अपमिश्रण से किस प्रकार का द्रोष उत्पन्न होता है?
सिलिकन में इलेक्टून धनी अशुद्धि को अपमिश्रित करने पर ______ बनता है।
अर्धचालकों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं।
- इलेक्ट्रॉन धनी अशुद्धि से अपमिश्रित सिलिकन एक p -प्रकार का अर्धचालक होता है।
- इलेक्रॉन धनी अशुद्ध से अपमिश्रित सिलिकन n -प्रकार का अर्धचालक होता है।
- विस्थानीकृत इलेक्ट्रॉन अपमिश्रित सिलिकन की चालकता बढ़ाते हैं।
- लेक्ट्रॉन रिक्तिका n- प्रकार अर्धचालक की चालकता बढ़ाती है
अभिकथन - अर्धचालक, 10-6 से 104 ohm-1 m-1 मध्यवर्ती परास की चालकता युक्त ठोस होते हैं।
तर्क - अर्धचालकों की मध्यवर्ती चालकता आंशिक रूप से भरे संयोजकता बैंड के कारण होती है।
