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"निर्माणों के पावन युग में" काव्य का रचना बोध लिखिए । - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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प्रश्न

"निर्माणों के पावन युग में" काव्य का रचना बोध लिखिए ।

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उत्तर

इस कविता में, लेखक ने नए शोध, संस्कृति की प्रतिष्ठा, और विश्व के कल्याण के साथ-साथ चरित्र निर्माण पर भी जोर दिया है। उनके अनुसार, मनुष्य के चरित्र का विकास ही विज्ञान, शिक्षा और नवीन आविष्कारों की महत्वपूर्णता का आधार है।

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निर्माणों के पावन युग में
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अध्याय 1.11: निर्माणों के पावन युग में - रचना बोध [पृष्ठ ३८]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Lokbharati [English] Standard 9 Maharashtra State Board
अध्याय 1.11 निर्माणों के पावन युग में
रचना बोध | Q (१) | पृष्ठ ३८

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कृति पूर्ण कीजिए:


निम्न शब्दों के अर्थ शब्दकोश की सहायता से ढूँढ़िए तथा उचित शब्द रिक्त स्थान में लिखिए:

आर्यभट्ट ने शून्य की ______ की।


निम्न शब्दों के अर्थ शब्दकोश की सहायता से ढूँढ़िए तथा उचित शब्द रिक्त स्थान में लिखिए:

प्रगति के लिए आपसी ______ आवश्यक है।


निम्न शब्दों के अर्थ शब्दकोश की सहायता से ढूँढ़िए तथा उचित शब्द रिक्त स्थान में लिखिए:

कार्यक्रम को शुरू करने के लिए अध्यक्ष महोदय की ______ चाहिए।


निम्न शब्दों के अर्थ शब्दकोश की सहायता से ढूँढ़िए तथा उचित शब्द रिक्त स्थान में लिखिए:

काले बादलों को देखकर बारिश की ______ है।


निम्न शब्दों के अर्थ शब्दकोश की सहायता से ढूँढ़िए तथा उचित शब्द रिक्त स्थान में लिखिए:

सड़क-योजना में सैकड़ों मजदूरों को ______ मिला।


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