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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए- मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरों न कोई जाके सिर मोर मुकट, मेरो पति सोई 'छाँड़ि दई कुल की कानि, कहा करिहै कोई?

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प्रश्न

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरों न कोई
जाके सिर मोर मुकट, मेरो पति सोई
'छाँड़ि दई कुल की कानि, कहा करिहै कोई?
संतन ढिग बैठि-बैठि, लोक लाज खोई।
अँसुवन जल सींचि-सीचि प्रेम बेलि बोई।
अब तो बेल फैल गई आँंद फल होई॥
दूध की मथनियाँ बड़े प्रेम से बिलोई।
भगत देखि राजी हुई जगत देखि रोई
दासी 'मीरा' लाल गिरिधर तारो अब मोहीं ॥

(1) पद्यांश के आधार पर संबंध जोड़कर उचित वाक्य तैयार कीजिए:   (2)

(i) तकिया  गुल्लक
(ii) बच्चों शुन्य
  रूई
  1. ____________
  2. ____________

(2) (i) निम्नलिखित के लिए पद्यांश से शब्द ढूँढ़कर लिखिए।   (1)

  1. दही मथने का बरतन - ______
  2. साजन - ______

(ii) पद्यांश में आए 'ढिग' शब्द के अलग-अलग अर्थ लिखिए।   (1)

  1. ____________
  2. ____________

(3) प्रथम दो पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।   (2)

संक्षेप में उत्तर
एक पंक्ति में उत्तर
एक शब्द/वाक्यांश उत्तर
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उत्तर

(1)

  1. मेरे तकिये में रूई भरी हुई है। 
  2. बच्चों को गुल्लक पसंद है।

(2) (i)

  1. दही मथने का बरतन - मथनियाँ
  2. साजन - पति

(ii)

  1. पास
  2. निकट

(3) प्रस्तुत गद्यांश में कवयित्री कहती हैं कि गिरी को धारण करने वो गाय के पालक श्री कृष्ण के अतिरिक्त मेरा दूसरा और कोई नहीं है। जिस श्री कृष्ण भगवान ने सिर पर मोर मुकुट धारण किया हैं, वहीं मेरे पति हैं।

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गिरिधर नागर
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