Advertisements
Advertisements
प्रश्न
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
राजेंद्र बाबू के निकट संपर्क में आने का अवसर मुझे सन 1937 में मिला जब वे काँग्रेस के अध्यक्ष के रूप में महिला विद्यापीठ महाविद्यालय के भवन का शिलान्यास करने प्रयाग आए। उनसे ज्ञात हुआ कि उनके संयुक्त परिवार में पंद्रह-सोलह पौत्रियाँ हैं जिनकी पढ़ाई की व्यवस्था नहीं हो पाई है। मैं यदि अपने छात्रावास में रखकर उन्हें विद्यापीठ की परीक्षाओं में बैठा सकूँ तो उन्हें कुछ विद्या प्राप्त हो सकेगी। पहले बड़ी फिर छोटी, फिर उनसे छोटी के क्रम से बालिकाएँ मेरे संरक्षण में आ गईं। उन्हें देखने प्राय: उनकी दादी और कभी-कभी दादा भी प्रयाग आते रहे। तभी राजेंद्र बाबू की सहधर्मिणी के निकट संपर्क में आने का अवसर मिला। वे सच्चे अर्थ में धरती की पुत्री थीं। वे साध्वी, सरल, क्षमामयी, सबके प्रति ममतालु और असंख्य संबंधों की सूत्रधारिणी थीं। ससुराल में उन्होंने बालिकावधू के रूप में पदार्पण किया था। |
(1) संजाल पूर्ण कीजिए: 2

(2) गद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए:
(i) विलोम शब्द को जोड़ी: 1
....... × .......
(ii) विरुद्ध लिंग की शब्द जोड़ी: 1
पुल्लिंग - .......
स्त्रीलिंग - .......
(3) ‘संयुक्त परिवार’ के बारे में 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। 2
Advertisements
उत्तर
(1)

(2)
(i) बड़ी × छोटी
(ii)
पुल्लिंग - दादा
स्त्रीलिंग - दादी
(3)
संयुक्त परिवार हमारे देश की पुरानी पारिवारिक परंपरा का एक प्रमुख स्वरूप रहा है। इसमें दादा-दादी, माता-पिता, बेटे-बहुएँ, भाई-भाभी और पोते-पोतियाँ सभी एक साथ रहते थे। उस समय अधिकतर लोग खेती पर निर्भर थे और खेतों में मिलकर छोटे-बड़े कार्य किया करते थे। परिवार का सबसे बुज़ुर्ग सदस्य मुखिया होता था और उसके निर्देशों के अनुसार सभी अपना कार्य करते थे।
छोटे सदस्यों को बड़ों का संरक्षण मिलता था, जबकि बड़ों को परिवार का स्नेह और सम्मान प्राप्त होता था। आज भी कुछ गाँवों में संयुक्त परिवार देखने को मिलते हैं, जहाँ आपसी प्रेम, अपनापन और सम्मान की भावना स्पष्ट दिखाई देती है। परंतु आधुनिकता के प्रभाव से ये संयुक्त परिवार धीरे-धीरे टूटते जा रहे हैं।
