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प्रश्न
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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कुछ दिनों पहले एक कंप्यूटर ने मुझे चालीस हजार रुपयों में खरीदा है! आज-कल उसकी गुलामी में हूँ। उसके नखरों को सिर झुकाकर झेलने में ही अपना कल्याण देख रहा हूँ। उसका वादा है कि एक दिन वह मुझे लिखने-पढ़ने की पूरी आजादी देगा। फिलहाल उसकी एकनिष्ठ सेवा में ही मेरा उज्ज्वल भविष्य है। इसके पहले एक मोटर मुझे भारी दामों में खरीद चुकी है। उसकी सेवा में भी हूँ। दरअसल, चीजों का एक पूरा परिवार है जिसकी सेवा में हूँ। आदमी का स्वभाव नहीं बदलता या बहुत कम बदलता है। गुलामी करना-करवाना उसके स्वभाव में है। सिर्फ तरीके बदले हैं, गुलामी की प्रवृत्ति नहीं। हजारों साल पहले एक आदमी मालिक होता था और उसके दर्जनों गुलाम होते थे। अब हर चीज के दर्जनों गुलाम होते हैं। |
- उचित घटनाक्रम लगाकर वाक्य फिर से लिखिए: 2
- सिर्फ तरीके बदले हैं, गुलामी की प्रवृत्ति नहीं।
- अब हर चीज के दर्जनों गुलाम होते हैं।
- एक कंप्यूटर ने मुझे चालीस हजार रुपयों में खरीदा है।
- आदमी का स्वभाव नहीं बदलता।
- ‘गुलामी एक कलंक’ इस विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। 2
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उत्तर
(1)
(iii) एक कंप्यूटर ने मुझे चालीस हजार रुपयों में खरीदा है।
(iv) आदमी का स्वभाव नहीं बदलता।
(i) सिर्फ तरीके बदले हैं, गुलामी की प्रवृत्ति नहीं।
(ii) अब हर चीज के दर्जनों गुलाम होते हैं।
(2)
दुनिया में कोई भी व्यक्ति गुलामी करना नहीं चाहता। केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षी भी बंधनों से मुक्त होकर स्वतंत्र वातावरण में जीना पसंद करते हैं। जो व्यक्ति पराधीनता की बेड़ियों में जकड़ा होता है, वह अपनी प्रतिभा को विकसित नहीं कर पाता और न ही उसका सही उपयोग कर सकता है। उसे हर कदम पर अपनी इच्छाओं को दबाना पड़ता है और मजबूरी में ऐसे कार्य करने पड़ते हैं, जो उसे पसंद नहीं होते। गुलामी में व्यक्ति की स्वतंत्र सोच और आजादी पर रोक लग जाती है। वह दूसरों के आदेशों पर कठपुतली की तरह व्यवहार करने लगता है। गुलामी एक बड़ा कलंक है, जिसका प्रभाव व्यक्ति की मुक्ति के बाद भी कई पीढ़ियों तक बना रहता है।
