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प्रश्न
निम्नलिखित परिच्छेद को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
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हम जानते हैं कि प्लाज़्मिड तथा जीवाणुभोजी (विषाणु) संवाहकों का जैव-प्रौद्योगिकी के प्रयोगों के लिए सर्वाधिक उपयोग किया जाता है। यदि हम विजातीय (एलियन) डीएनए के किसी खंड को प्लाज़्मिड के डीएनए के साथ जोड़ सकें, तो विजातीय (एलियन) डीएनए को प्लाज़्मिड की प्रतिकृति संख्या के समान गुणित कर सकते हैं। आजकल अभियांत्रिक संवाहकों का उपयोग किया जा रहा है। ई. कोलाई क्लोनिंग संवाहक pBR322 का आरेख नीचे दिया गया है। इसका अध्ययन करके अग्रगामी प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
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(क) प्लाज़्मिडों तथा जीवाणुभोजियों का क्लोनिंग संवाहक के रूप में उपयोग क्यों किया जाता है? 1
(ख) (i) पहचानिए: 1
- क्लोनिंग संवाहक का वह जीन जो संवाहक की प्रतिकृति संख्या का नियंत्रण करता है।
- ‘rop’ जीन में प्रतिबंधन स्थल - C।
अथवा
(ख) (ii) आरेखित चित्र में दर्शाए गए दो वरणयोग्य चिह्नकों को पहचानिए तथा उनके नाम लिखिए। 1
(ग) आपने जिन दो जीनों की पहचान वरणयोग्य चिह्नकों के रूप में की है, उनमें से प्रत्येक के दो-दो प्रतिबंधन स्थलों के नाम लिखिए। 2
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उत्तर
(क) प्लास्मिड एवं जीवाणुभोजी (बैक्टीरियोफेज) को क्लोनिंग वाहक के रूप में इसलिए उपयोग किया जाता है क्योंकि:
- ये स्वयं की प्रतिकृति बना सकते हैं।
- इनमें विदेशी डीएनए को जोड़ने की क्षमता होती है और उसे कोशिका में बढ़ा सकते हैं।
(ख) (i)
- rop जीन
- rop जीन का कार्य कॉपी संख्या नियंत्रण है, न कि प्रतिबंधन स्थल प्रदान करना।
अथवा
(ख) (ii) एम्पिसिलिन प्रतिरोध (ampR) और टेट्रासाइक्लिन प्रतिरोध (tetR)
(ग) दोनों वरणीय चिन्हों में उपस्थित दो-दो प्रतिबंधन स्थल:
ampR जीन में:
- Pst I
- Pvu I
tetR जीन में:
- Bam HI
- Hind III

