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निम्नलिखित पंक्तियों की व्याख्या कीजिए- तुम्ह बिनु कंता धनि हरुई, तन तिनुवर भा डोल।तेहि पर बिरह जराई कै, चहै उड़ावा झोल।।

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प्रश्न

निम्नलिखित पंक्तियों की व्याख्या कीजिए-

तुम्ह बिनु कंता धनि हरुई, तन तिनुवर भा डोल।
तेहि पर बिरह जराई कै, चहै उड़ावा झोल।।

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उत्तर

प्रस्तुत पंक्तियों में नागमती कहती है कि हे प्रियतम! मैं तुम्हारे वियोग में सूखती जा रही हूँ। मेरी स्थिति तिनके के समान हो गई है। अर्थात में कमज़ोर हो गई हूँ। मैं इतनी दुर्बल हो गई हूँ कि मेरा शरीर वृक्ष के समान हिलने लगता है। अर्थात जिस प्रकार वृक्ष हवा के झोंके से ही हिलने लगता है, इसी प्रकार में कमज़ोर होने के कारण हिल जाती हूँ। इस पर भी यह विरहग्नि मुझे राख बनाने को व्यग्र है तथा मेरे तन की राख को भी उड़ा दिए जा रहा है।

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बारहमासा
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अध्याय 1.07: मलिक मुहम्मद जायसी (बरहमासा) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ५२]

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एनसीईआरटी Hindi Antara Bhag 2 [English] Class 12
अध्याय 1.07 मलिक मुहम्मद जायसी (बरहमासा)
प्रश्न-अभ्यास | Q 5. (ग) | पृष्ठ ५२

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