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प्रश्न
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
| हरि हैं राजनीति पढ़ि आए। समुझी बात कहत मधुकर के, समाचार सब पाए। इक अति चतुर हुते पहिलें ही, अब गुरु ग्रंथ पढ़ाए। बढ़ी बुद्धि जानी जो उनकी, जोग-देस पठाए। ऊधो भले लोग आगे के, पर हित डोलत धाए। अब अपनै मन फेर पाइहैं, चलत जु हुते चुराए। ते क्यों अनीति करें आपुन, जे और अनीति छुड़ाए। राज धरम तौ यहै ‘सूर’, जो प्रजा ने जाहिं सताए॥ |
(क) ‘इक अति चतुर हुते पहिलें ही, अब गुरु ग्रंथ पढ़ाए।’ में निहित व्यंग्य को समझाइए। [2]
(ख) श्रीकृष्ण द्वारा चुराए गए मन को वापस माँगने में निहित गोपियों की मनोव्यथा को स्पष्ट कीजिए। [2]
(ग) गोपियों के अनुसार सच्चा राजधर्म क्या है? उन्होंने 'राजधर्म' का उल्लेख क्यों किया है? [2]
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उत्तर
(क) कृष्ण ने गोपियों को आश्वासन दिया, लेकिन वे वापस नहीं आए। गोपियों ने कहा कि वे अब एक राजनीतिज्ञ की तरह व्यवहार करने लगे हैं।
(ख) श्रीकृष्ण ने हमें त्याग दिया है, क्योंकि वह हमें मिलने का वादा नहीं निभाने के कारण हमें बहुत दुःख हुआ है। गोपियों ने बताया कि उन्हें अब कृष्ण से कोई उम्मीद नहीं है।
(ग) गोपियों का मानना है कि राजा का सच्चा धर्म (राजधर्म) यह होना चाहिए कि वह अपने जनता को कभी नहीं सताए और उनकी सेवा में लगा रहे। जनता को अन्याय से छुटकारा दिलाना इसलिए श्रीकृष्ण हमें न्याय करना चाहिए। गोपियों द्वारा राजधर्म का उल्लेख करते हुए यह याद दिलाना कि वे भी उनकी प्रजा हैं और सबके प्रति समभाव रखना उनका कर्तव्य है। यही कारण है कि उनके साथ भी अन्याय नहीं होने देना उनका कर्तव्य है।
