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प्रश्न
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए: [6]
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अंग्रेज पिता थे जो अपने बच्चों के साथ भाग रहे थे, हँस रहे थे और खेल रहे थे। उधर भारतीय पितृदेव भी थे, जो बुजुर्गों को अपने चारों तरफ लपेटे धन-संपन्नता के लक्षणों का प्रदर्शन करते हुए चल रहे थे। अंग्रेज रमणियां थी। जो धीरे नहीं चलती थीं, तेज चलती थीं, तेज चलती थी। उन्हे न चलने मे थकावट आती थी, न हसने मे लाज आती थी। कसरत के नाम पर भी बैठ सकती थी, और घोड़े के साथ-ही-साथ जरा जी होते ही, किसी हिन्दुस्तानी पर भी कोड़े फटकार सकती थी। वह दो-दो, तीन-तीन, चार-चार की टोलियों मे निशंक, निरपट, इस प्रवाह मे मानो अपने स्थान को जानती हुई, सड़क पर से चली जा रही थी। उधर हमारी भारत की कुलकश्मीया, सड़क के बिल्कुल किनारे-किनारे, दामन बचाती और संभालती हुई, साड़ी की कई तहों मे सिमट - सिमटकर, लोक-लाज, स्त्रीत्व और भारतीय गरिमा के आदर्श को अपने परिवेशतनों मे छिपाकर, सहमी-सहमी धरती मे आखें गाड़े: कदम-कदम बढ़ रही थी। |
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तालिका पूर्ण किजिए: [2]

- निम्नलिखित शब्दों के वचन बदलकर लिखिए: [2]
- रमणी
- बच्चे
- घोड़ा
- आँखें
- ‘भारतीय नारी’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। [2]
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उत्तर
1. 
2.
- रमणी - रमणियाँ
- बच्चे - बच्चा
- घोड़ा - घोड़े
- आँखें - आँख
3. भारतीय नारी शक्ति, सहनशीलता और त्याग की प्रतीक है। वह परिवार और समाज की आधारशिला होती है। प्राचीन काल से लेकर आज तक उसने हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा सिद्ध की है। शिक्षा, विज्ञान, राजनीति और खेलों में भी भारतीय नारी ने देश का नाम रोशन किया है।
