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प्रश्न
निम्नलिखित अपठित गदूयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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जीवन निर्वाह या धन कमाने के लिए अनेक व्यवसाय चल रहे हैं। इनके मोटे तौर पर दो वर्ग किए जा सकते हैं। कुछ व्यवसाय ऐसे हैं, जिनमें शरीर श्रम आवश्यक है और कुछ ऐसे हैं जो बुद्धि के बल पर चलाए जाते हैं। पहले प्रकार के व्यवसाय को हम श्रमजीवियों के व्यवसाय कहें और दूसरों को बुद्धिजीवियों के। राज-काज चलाने वाले मंत्री आदि तथा राज के कर्मचारी ऊँचे-ऊँचे पद से लेकर नीचे के क्लर्क तक, न्यायाधीश, वकील, डॉक्टर, अध्यापक, व्यापारी आदि ऐसे हैं जो अपना भरण-पोषण बौद्धिक काम से करते हैं। शरीर श्रम से अपना निर्वाह करने वाले हैं - किसान, मजदूर, बढ़ई, राज, लुहार आदि। समाज के व्यवहार के लिए इन बुद्धिजीवियों और श्रमजीवियों, दोनों प्रकार के लोगों की जरूरत है। बुद्धिजीवियों का जीवन श्रमजीवियों पर आधारित है। ऐसा होते हुए भी दुर्भाग्य यह है कि श्रमजीवियों की मजदूरी एवं आमदनी कम है, समाज में उनकी प्रतिष्ठा नहीं और उनको अपना जीवन प्रायः कष्ट में ही बिताना पड़ता है। |
(1) लिखिए: (2)
(2) तुलना कीजिए: (2)
| श्रमजीवी | बुद्धिजीवी |
| (i) -------------- | -------------- |
| (ii) -------------- | -------------- |
(3) ‘मेवे फलते श्रम की डाल पर’ इस कथन पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
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उत्तर
(1)
(2)
| श्रमजीवी | बुद्धिजीवी |
| (i) श्रम की आवश्यकता होती है। | बुद्धि की आवश्यकता होती है। |
| (ii) इन्हें जीवन प्रायः कष्ट में ही बिताना पड़ता है। | इनका जीवन प्रायः सुख से बीतता है। |
(3) सच्ची लगन, दृढ़ निश्चय और उत्साह रखने वाला व्यक्ति असंभव को भी संभव कर दिखाता है। मेहनती व्यक्ति पर्वत, समुद्र और अंतरिक्ष जैसी कठिनाइयाँ पार कर सफलता प्राप्त करता है, जबकि आलसी व्यक्ति दोष दूसरों पर डालता है। मेहनत ही जीवन में सच्चा आनंद लाती है।
