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प्रश्न
निम्नलिखित अभिक्रियाओं में एक ही अपचायक थायोसल्फेट, आयोडीन तथा ब्रोमीन से अलग-अलग प्रकार से अभिक्रिया क्यों करता है?
\[\ce{2S2O^2-_3(aq) + I2(s) -> S4O^2-_6(aq) + 2I^-(aq)}\]
\[\ce{S2O^2-_3(aq) + 2Br2(I) + 5H2O(I) -> 2SO^2-_4(aq) + 4Br^-(aq) + 10H^+(aq)}\]
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उत्तर
प्रस्तुत स्पीशीज (species) में S की ऑक्सीकरण संख्या निम्न है-
\[\ce{S2O^{2-}_3 = +2, S4O^{2-}_6 = 2.5, SO^{2-}_4 = +6}\]
ब्रोमीन, आयोडीन से अधिक प्रबल ऑक्सीकारक है। इसलिए यह \[\ce{S2O^{2-}_3}\] (S की 0.S. = +2) को \[\ce{SO^{2-}_4}\] (S की O.S. = +6) में ऑक्सीकृत कर देता है; जिसमें S उच्च-ऑक्सीकरण अवस्था में है। I2 एक दुर्बल ऑक्सीकारक की तरह व्यवहार करता है। यह \[\ce{S2O^{2-}_3}\] को \[\ce{S4O^{2-}_6}\] (S की O.S. = 2.5) में ऑक्सीकृत करता है, जिसमें S की ऑक्सीकरण-अवस्था कम है। यही कारण है कि \[\ce{S2O^{2-}_3}\], Br2 से I2 से अलग-अलग प्रकार से अभिक्रिया करता है।
संबंधित प्रश्न
AgF2 एक अस्थिर यौगिक है। यदि यह बन जाए, तो यह यौगिक एक अति शक्तिशाली ऑक्सीकारक की भाँति कार्य करता है। क्यों?
निम्नलिखित अभिक्रियाओं में ऑक्सीकृत, अपचयित, ऑक्सीकारक तथा अपचायक पदार्थ पहचानिए-
\[\ce{HCHO(l) + 2[Ag(NH3)2]^+(aq) + 3OH^-(aq) -> 2Ag(s) + HCOO^-(aq) + 4NH3(aq) + 2H2O(l)}\]
निम्नलिखित अभिक्रियाओं में ऑक्सीकृत, अपचयित, ऑक्सीकारक तथा अपचायक पदार्थ पहचानिए-
\[\ce{HCHO(l) + 2Cu^2+(aq) + 5OH^-(aq) -> Cu2O(s) + HCOO^-(aq) + 3H2O(l)}\]
निम्नलिखित अभिक्रिया में ऑक्सीकृत, अपचयित, ऑक्सीकारक तथा अपचायक पदार्थ पहचानिए-
\[\ce{N2H4(l) + 2H2O2(l) -> N2(g) + 4H2O(l)}\]
निम्नलिखित अभिक्रिया में ऑक्सीकृत, अपचयित, ऑक्सीकारक तथा अपचायक पदार्थ पहचानिए-
\[\ce{Pb(s) + PbO2(s) + 2H2SO4(aq) -> 2PbSO4(s) + 2H2O(l)}\]
अभिक्रिया देते हुए सिद्ध कीजिए कि हैलोजनों में फ्लुओरीन श्रेष्ठ ऑक्सीकारक तथा हाइड्रोहैलिक यौगिकों में हाइड्रोआयोडिक अम्ल श्रेष्ठ अपचायक है।
नीचे दिए गए मानक इलेक्ट्रोड विभवों के आधार पर धातुओं को उनकी बढ़ती अपचायक क्षमता के क्रम में लिखिए-
K+/K = -2.93 V, Ag+/Ag = 0.80 V, Hg2+/Hg = 0.79 V
Mg2+/Mg = -2.37 V, Cr3+/Cr = -0.74 V
