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प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवयित्री ने दीपक को हर बार अलग-अलग तरह से ‘मधुर मधुर, पुलक-पुलक, सिहर-सिहर और विहँस-विहँस’ जलने को क्यों कहा है? स्पष्ट कीजिए।
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उत्तर
कवयित्री ने अपने आस्था रूपी दीपक को हर बार अलग-अलग ढंग से जलने के लिए कहा है। कभी मधुर-मधुर, कभी पुलक-पुलक और कभी विहँस-विहँस खुशी को व्यक्त करने के लिए कहती है। ‘मधुर-मधुर’ में मौन मुस्कान है। ‘पुलक-पुलक’ में हँसी की उमंग है। कवयित्री चाहती है कि उसकी भक्ति भावना में प्रसन्नता बनी रहे। चाहे कैसी भी स्थिति क्यों न हो आस्था रूपी आध्यात्मिक दीपक सदैव जलता रहे और परमात्मा का मार्ग प्रशस्त करे।। कवयित्री के अनुसार परमात्मा को पाने के लिए भक्त को अनेक अवस्थाओं को पार कर भिन्न-भिन्न भावों को अपनाना पड़ता है। उसे आस्था रूपी दीपक प्रज्वलित रखना पड़ता है।
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| मेरी निश्वासों से द्रुततर, सुभग न तू बुझने का भय कर; मैं अँचल की ओट किए हूँ, अपनी मृदु पलकों से चंचल ! सहज-सहज मेरे दीपक जल ! सीमा ही लघुता का बंधन, है अनादि तू मत घड़ियाँ गिन; मैं दृग के अक्षय कोषों से तुझ में भरती हूँ आँसू जल ! सजल-सजल मेरे दीपक जल ! |
इस पद्यांश पर ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर निम्न शब्द हों।
- सीमा = ______
- आँसू जल = ______
| मेरी निश्वासों से द्रुततर, सुभग न तू बुझने का भय कर; मैं अँचल की ओट किए हूँ, अपनी मृदु पलकों से चंचल ! सहज-सहज मेरे दीपक जल ! सीमा ही लघुता का बंधन, है अनादि तू मत घड़ियाँ गिन; मैं दृग के अक्षय कोषों से तुझ में भरती हूँ आँसू जल ! सजल-सजल मेरे दीपक जल ! |
पद्यांश में आए उपसर्ग-प्रत्यययुक्त शब्दों काे ढूँढ़कर लिखिए।
एक शब्द में उत्तर दीजिए:
लघुता का बंधन - ______
एक शब्द में उत्तर दीजिए:
माँग रहे तुमसे - ______
