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महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (हिंदी माध्यम) १० वीं कक्षा

निम्‍नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्‍तर गद्यांश में एक-एक वाक्‍य में हों: विख्यात गणितज्ञ सी. वी. रमन ने छात्रावस्‍था में ही विज्ञान के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का

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प्रश्न

निम्‍नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्‍तर गद्यांश में एक-एक वाक्‍य में हों:

           विख्यात गणितज्ञ सी. वी. रमन ने छात्रावस्‍था में ही विज्ञान के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का सिक्का देश में ही नहीं विदेशों में भी जमा 
लिया था।
           रमन का एक साथी छात्र ध्वनि के संबंध में कुछ प्रयोग कर रहा था। उसे कुछ कठनिाइयाँ प्रतीत हुईं, संदेह हुए। वह अपने अध्यापक जोन्स साहब के पास गया परंतु वह भी उसका संदेह निवारण न कर सके। रमन को पता चला तो उन्होंने उस समस्‍या का अध्ययन-मनन किया और इस संबंध में उस समय के प्रसिद्ध लॉर्ड रेले के निबंध पढ़े और उस समस्‍या का एक नया ही हल खोज निकाला। यह हल पहले हल से सरल और अच्छा था। लाॅर्ड रेले को इस बात का पता चला तो उन्होंने रमन की प्रतिभा की भूरि-भूरि प्रशंसा की। अध्यापक जोन्स भी प्रसन्न हुए और उन्होंने रमन से इस प्रयोग के संबंध में लेख लिखने को कहा।
लघु उत्तरीय
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उत्तर

  1. किसने छात्रावस्था में ही विज्ञान के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का सिक्का जमा लिया था?
  2. रमण का एक साथी किस संबंध में प्रयोग कर रहा था?
  3. किसने रमन की प्रतिभा की भूरि-भूरि प्रशंसा की?
  4. किसने रमन को लेख लिखने के लिए कहा?
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गद्‍य आकलन
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संबंधित प्रश्न

निम्‍नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे पाँच प्रश्न तैयार कीजिए, जिनके उत्‍तर एक-एक वाक्‍य में हों :

विख्यात गणितज्ञ सी.वी. रमण ने छात्रावस्‍था में ही विज्ञान के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का सकि्‍का देश में ही नहीं विदेशों में भी जमा 
लिया था।           
      रमन का एक साथी छात्र ध्वनि के संबंध में कुछ प्रयोग कर रहा था । उसे कुछ कठनिाइयाँ प्रतीत हुईं, संदेह हुए । वह अपने अध्यापक जोन्स साहब के पास गया परंतु वह भी उसका संदेह निवारण न कर सके । रमण को पता चला तो उन्होंने उस समस्‍या का अध्ययन-मनन किया और इस संबंध में उस समय के प्रसद्धि लॉर्डरेले के नबिंध पढ़े और उस समस्‍या का एक नया ही हल खोज नकिाला । यह हल पहले हल से सरल और अच्छा था। लाॅर्ड रेले को इस बात का पता चला तो उन्होंने रमण की प्रतिभा की भूरि-भूरि प्रशंसा की । अध्यापक जोन्स भी प्रसन्न हुए और उन्होंने रमण से इस प्रयोग के संबंध में लेख लिखने को कहा । रमण ने लेख लिखकर श्री जोन्स को दिया, पर जोन्स उसे जल्‍दी लौटा न सके । कारण संभवतः यह था कि वह उसे पूरी तरह आत्‍मसात न कर सके ।

प्रश्न :

  1. ______
  2. ______
  3. ______
  4. ______
  5. ______

निम्‍नलिखित परिच्छेद पढ़कर उसपर आधारित ऐसे पाँच प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्‍तर एक-एक वाक्‍य में हों :   

महर्षि कर्वे १०५ वर्ष तक जीवित रहे। जब देश भर में उनकी जन्म शताब्‍दी मनाई गई तो मुंबई की एक सभा में नेहरू जी ने कहा था, ‘‘आपके जीवन से प्रेरणा और स्‍फूर्ति प्राप्त होती है। आपका जीवन इस बात की बेमिसाल कहानी है कि एक मानव क्‍या कर सकता है । मैं आपको बधाई देने नहीं आया वरन आपसे आशीर्वाद लेने आया हूँ।’’

भारतरत्‍न डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था, ‘‘डॉ. कर्वे का जीवन इस बात का ज्‍वलंत प्रमाण है कि दृढ़ धारणावाला साधारण व्यक्‍ति भी सर्वथा विपरीत परिस्‍थितियों में भी महान कार्य कर सकता है।’’

अण्णा साहब उन इक्‍के-दुक्‍के व्यक्‍तियों में से थे जो एक बार निश्चय कर लेने पर असाध्य कार्य को सिद्ध करने में लग जाते और उसे पूरा करके दिखा देते। भारत सदा से महान पुरुष रत्‍नों की खान रहा है और डॉ. कर्वे उन समाज सुधारकों में से थे जिन्होंने किसी सिद्धांत को पहले अपने जीवन में उतारकर उसे क्रियात्‍मक रूप दिया। हम प्रायः भाग्‍य को कोसा करते हैं और धन की कमी की शिकायत किया करते हैं परंतु यह उस व्यक्‍ति की कहानी है जो गरीब घर में पैदा हुआ, बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर स्‍वयं पढ़ाई की और इस अकेले व्यक्‍ति ने ‘भारतीय महिला विद्यापीठ’ की स्‍थापना की।

प्रश्न :

  1. ______
  2. ______
  3. ______
  4. ______
  5. ______ 

निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

उन दिनों बापू की हिन्दी अच्छी नहीं थी, पर वे अपनी अट-पट वाणी में ही अपना सारा आशय कह डालते थे। वे शब्दों में बोलते कहाँ थे, उनका हृदय बोलता था। उनका व्यक्तित्व बोलता था, उनकी साधना बोलती थी और उनके बोल हृदय में घुल जाते थे, कान बेकार खड़े रहते थे। मैं बहुत दिन यही समझता रहा कि ‘वक्त के साथ दगाबाजी’ बापू की अट-पटी हिन्दी का एक नमूना है। पता नहीं, वे क्या कहना चाहते थे और हिन्दी में उनको यही शब्द सुलभ हो पाए। पर जब सोचता हूँ बापू बिल्कुल यही कहना चाहते थे और जो वे कहना चाहते थे, उसको दूसरे शब्दों में नहीं कहा जा सकता। एक शब्द एक मात्रा से कम नहीं। बापू बनिया थे, अपने बनियेपन पर उन्हें गर्व था। शायद शब्दों के मामले में वे सबसे अधिक बनिये थे। न जरूरत से ज्यादा न जरूरत से कम। और हर शब्द सच्चा, खरा यथार्थ भरा।

(1) संजाल पूर्ण कीजिए: (2)

(2) ‘वाणी का महत्व’ इस विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार व्यक्त कीजिए। (2)


गद्‌य - आकलन- (5० से ७० शब्द)

निम्नलिखित गद्यखंड पर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों । मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता है। वह चाहे तो आकाश के तारों को तोड़ ले, वह चाहे तो पृथ्वी के वक्षस्थल को तोड़कर पाताल लोक में प्रवेश कर जाए, वह चाहे तो प्रकृति को खाक बनाकर उड़ा दे । उसका भविष्य उसकी मुट्ठी में है। प्रयत्न के द्वारा वह क्या नहीं कर सकता है ? यह समस्त बातें हम अतीत काल से सुनते चले आ रहे हैं और इन्हीं बातों को सोचकर कर्मरत होते हैं परंतु अचानक ही मन में यह विचार आ जाता है कि क्या हम जो कुछ करते हैं वह हमारे वश की बात नहीं है ?


उपयुक्त प्रश्नचार्ट:


उपयुक्त प्रश्नचार्ट:


उपयुक्त प्रश्नचार्ट:


उपयुक्त प्रश्नचार्ट:


उपयुक्त प्रश्नचार्ट:


निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

सन 1911 में, सत्येंद्रनाथ ने उच्चतर माध्यमिक की विज्ञान की परीक्षा दी और प्रथम आए। मेघनाथ साहा ने ढाका कॉलेज से परीक्षा दी थी और वरीयता क्रम में वे दूसरे स्थान पर थे। निखिल रंजन सेन ने इस परीक्षा में तीसरा स्थान प्राप्त किया।

सत्येन, निखिल रंजन और मेघनाथ साहा ने विज्ञान स्नातक की पढ़ाई के लिए गणित को चुना। वार्षिक परीक्षा में सत्येंद्र प्रथम आए, मेघनाथ द्वितीय और निखिल रंजन तृतीय। सन 1915 की विज्ञान स्नातकोत्तर की परीक्षा में भी ऐसा ही परिणाम आया।

जल्द ही सत्येन विश्वविद्यालय में 'चौदह चश्मों वाले लड़के' के मशहूर हो गए । वह अपना खाली समय अपने सहपाठियों और निचली कक्षाओं में पढ़ रहे मित्रों को पढ़ाने में व्यतीत करते थे। वह उन्हें हरीश सिन्हा के घर पर पढ़ाते थे। नीरेंद्रनाथ राय और दिलीप कुमार राय को इन कक्षाओं से वहुत लाभ हुआ। इसी दौरान सत्येन 'सबूज पत्र' नामक दल से सक्रिय से जुड़ गए। दल के सदस्य प्रथमा चौघरी के घर पर इकट्ठे होते थे।

(1) उत्तर लिखिए:        [2]

(2) 'ज्ञान देने से ज्ञान बढ़ता है' विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।      [2]


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