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प्रश्न
“मुझे बहुतों की अपने लिए जरूरत पड़ती थी। मैं भी बहुतों की जरूरत का उनके लिए जवाब था।”
(क) प्रातःकाल से लेकर रात्रि तक आप अपने किन-किन कार्यों में किस-किसका क्या सहयोग लेते हैं और आप दूसरों को किस तरह का सहयोग देते हैं? अपने अनुभव लिखिए।
(ख) उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द ‘बहुतों’ में कौन-कौन सम्मिलित होंगे, अनुमान के आधार पर लिखिए।
(ग) रचनाकार को स्वयं के लिए दूसरे लोगों से किस प्रकार के सहयोग की आवश्यकता पड़ती होगी और वह दूसरों को किस प्रकार का सहयोग देता होगा, अनुमान के आधार पर लिखिए।
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उत्तर
(क) सुबह से रात तक मैं अनेक लोगों के सहयोग पर निर्भर रहता हूँ। मेरी माँ मुझे जगाती हैं और मेरे लिए भोजन तैयार करती हैं। पिताजी मुझे विद्यालय पहुँचाते हैं। बस चालक मुझे सुरक्षित रूप से स्कूल ले जाता है। मार्ग में तैनात यातायात पुलिसकर्मी हमें सुचारु रूप से रास्ता उपलब्ध कराते हैं। विद्यालय का चौकीदार, शिक्षक, दूधवाला, कपड़े प्रेस करने वाला और न जाने कितने लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मेरी सहायता करते हैं। जहाँ तक मेरा प्रश्न है, मैं भी बस को समय पर चलाने और विद्यालय में अनुशासन बनाए रखने में सहयोग देता हूँ। यदि मेरा कोई मित्र बीमार हो जाता है, तो मैं उसे विद्यालय का गृहकार्य भेजता हूँ और आवश्यकता पड़ने पर उसकी सहायता करता हूँ। मैं माँ द्वारा बताए गए कार्य भी करता हूँ, जैसे दूध लाना और प्रेस के कपड़े देना आदि।
(ख) इन लोगों में मुख्य रूप से मेरे माता-पिता, भाई-बहन, घर का नौकर, दूधवाला, प्रेसवाला, चौकीदार, चालक, शिक्षक, मित्र, दुकानदार, माली, क्लर्क, आया और डॉक्टर आदि शामिल हैं।
(ग) एक रचनाकार को भी अपने पाठकों, श्रोताओं, प्रशंसकों और आलोचकों के सहयोग की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त उसे कागज़, पेन, अन्य लेखन सामग्री, प्रकाशक और वितरक जैसे लोगों की भी जरूरत पड़ती है। सबसे महत्वपूर्ण सहयोग पाठकों और श्रोताओं का होता है, क्योंकि लेखक उन्हीं के लिए लिखता है। यदि पाठक उसकी रचनाएँ न पढ़ें, श्रोता उन्हें न सुनें और आलोचक अपनी प्रतिक्रिया न दें, तो लेखक का लेखन उद्देश्यहीन हो जाता है।
