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“देश की हीनता और गौरव का ही फल उसे नहीं मिलता, उसकी हीनता और गौरव का फल भी उसके देश को मिलता है”, अपने आस-पास केविभिन्न उदाहरणों के द्वारा इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।

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प्रश्न

“देश की हीनता और गौरव का ही फल उसे नहीं मिलता, उसकी हीनता और गौरव का फल भी उसके देश को मिलता है”, अपने आस-पास के
विभिन्न उदाहरणों के द्वारा इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।

स्पष्ट कीजिए
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उत्तर

यह सत्य है कि देश और नागरिक दोनों एक-दूसरे से लाभान्वित होते हैं। मुझे एक घटना याद आती है जब मैं श्रीलंका की यात्रा पर गया था। वहाँ मेरा बहुत आदर-सत्कार हुआ। मैं विवेकानंद मंदिर गया, जहाँ के पुजारियों ने मुझे भारतीय जानकर विशेष सम्मान दिया। उस समय मुझे अनुभव हुआ कि मेरे देश की प्रतिष्ठा के कारण मेरा सम्मान भी बढ़ गया है।

इसके बाद मैं एक होटल में ठहरा। मेरे साथ मेरे प्रांत के तीन अन्य मित्र भी थे। होटल छोड़ते समय उन्होंने कुछ बर्तन अपने सामान में रख लिए, जिसके कारण वे पकड़े गए। तब होटल के मालिक ने मेरे प्रांत का नाम लेकर स्वागत कक्ष को निर्देश दिया कि भविष्य में उस प्रांत के लोगों को कमरा न दिया जाए। इस प्रकार कुछ व्यक्तियों के अनुचित व्यवहार ने पूरे देश की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाई।

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अध्याय 7: मैं और मेरा देश - अभ्यास [पृष्ठ १२९]

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एनसीईआरटी Hindi Ganga [English] Class 9
अध्याय 7 मैं और मेरा देश
अभ्यास | Q 1. | पृष्ठ १२९
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