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“मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारे” कविता में मेंढकों की टर्र-टर्र को भी प्यारा गीत कहा गया है। आपके विचार से बेसुरी ध्वनियाँ भी कब-कब अच्छी लगने लगती हैं?

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प्रश्न

“मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारे”

कविता में मेंढकों की टर्र-टर्र को भी प्यारा गीत कहा गया है। आपके विचार से बेसुरी ध्वनियाँ भी कब-कब अच्छी लगने लगती हैं?

विस्तार में उत्तर
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उत्तर

बेसुरी ध्वनियाँ भी इन अवसरों पर अच्छी लगने लगती हैं–

  • वर्षा ऋतु में मेंढकों की ‘टर्र-टर्र’ खुशी और हरियाली की सूचना देती है, इसलिए वह प्यारे गीत जैसी सुनाई देती है।
  • किसान के लिए यह ध्वनि अच्छी फसल और सुख-समृद्धि का संकेत है, इसलिए उसे मधुर लगती है।
  • बादल की गरज डरावनी होते हुए भी बारिश की खुशखबरी देने के कारण अच्छी लगती है।
  • जब हमें बहुत भूख लगी हो और सामने स्वादिष्ट भोजन हो, तो खाने की ‘चट-चट, कुरकुर’ आवाज़ भी सुहावनी लगती है।
  • त्योहार या किसी खुशी के अवसर पर ढोल-नगाड़ों का शोर भी अच्छा लगता है।
  • अपनों का प्यार भरा डाँटना-चिढ़ाना भी मधुर लगता है।

इसका कारण यह है कि जब हमारा मन प्रसन्न होता है, तब हमें हर ध्वनि संगीत जैसी सुंदर लगने लगती है।

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अध्याय 7: वर्षा-बहार - पाठ से आगे [पृष्ठ ९२]

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एनसीईआरटी Hindi Malhar Class 7
अध्याय 7 वर्षा-बहार
पाठ से आगे | Q (ख) | पृष्ठ ९२
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