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“मेह उन पर है बरसता एक सा, एक सी उन पर हवायें हैं बही। पर सदा ही यह दिखाता है हमें, ढंग उनके एक से होते नहीं।”

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प्रश्न

पाठ में से चुनकर एक पंक्ति नीचे दी गई है। इसे ध्यान से पढ़िए और इस पर विचार कीजिए। आपको इसका क्या अर्थ समझ में आया? अपना विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।

“मेह उन पर है बरसता एक सा,
एक सी उन पर हवायें हैं बही।
पर सदा ही यह दिखाता है हमें,
ढंग उनके एक से होते नहीं।”

विस्तार में उत्तर
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उत्तर

इन पंक्तियों का अर्थ: फूल और काँटा दोनों एक ही जगह जन्म लेते हैं और एक ही पौधा उन्हें पालता है। 'मेह' अर्थात बादल दोनों पर एक जैसा बरसता है, एक जैसी हवाएँ दोनों पर बहती हैं और एक सी चाँदनी दोनों पर डालती है। यानी दोनों को प्रकृति की ओर से एक जैसा स्नेह और देखभाल मिलती है। फिर भी दोनों के ढंग (स्वभाव और व्यवहार) कभी एक जैसे नहीं होते– फूल सुगंध, रंग और खुशी देता है, जबकि काँटा चुभकर दुख पहुँचाता है। भाव यह है कि परिस्थितियाँ सबके लिए लगभग एक जैसी होती हैं, पर हर व्यक्ति का स्वभाव और कर्म उसका अपना होता है। अच्छे संस्कार, अच्छे विचार और अच्छे कर्म ही हमें फूल जैसा बनाते हैं, न कि केवल अनुकूल परिस्थितियाँ।

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अध्याय 3: फूल और काँटा - पाठ से [पृष्ठ ३१]

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एनसीईआरटी Hindi Malhar Class 7
अध्याय 3 फूल और काँटा
पाठ से | Q (क) | पृष्ठ ३१
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