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प्रश्न
‘मधुर-मधुर मेरे दीपक जल’ के आधार पर विश्व-शलभ की स्थिति स्पष्ट कीजिए। ऐसे लोगों के प्रति कवयित्री की क्या सोच है?
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उत्तर
‘मधुर-मधुर मेरे दीपक जल’ कविता से ज्ञात होता है कि विश्व रूपी पतंगा अपनी स्थिति पर पछताता है। वह दुख प्रकट करते हुए कहता है कि वह उस प्रभु भक्ति की आस्था रूपी दीपक की ज्वाला से एकाकार न हो सका। वह इस ज्वाला में अपना अहंकार न जला पाने से अब भी अहंकार, ईर्ष्या, अंधकार, मोह, तृष्णा आदि में डूबा हुआ कष्ट भोग रहा है। आस्था एवं आध्यात्मिकता के अभाव में वह प्रभु भक्ति से दूर रह गया और न भक्ति का आनंद उठा सका और न प्रभु का सान्निध्य प्राप्त कर सका। ऐसे लोगों के बारे में कवयित्री सोचती है कि उन्हें भी प्रकाशपुंज से चिनगारी प्राप्त कर अपनी आस्था का दीप जला लेना चाहिए।
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प्रस्तुत कविता में 'दीपक' और 'प्रियतम' किसके प्रतीक हैं?
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(क) शब्दों की आवृति पर।
(ख) सफल बिंब अंकन पर।
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निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए-
दे प्रकाश का सिंधु अपरिमित,
तेरे जीवन का अणु ल गल !
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए-
मृदुल मोम सा घुल रे मृदु तन!
इस कविता में जो भाव आए हैं, उन्हीं भावों पर आधारित कवयित्री द्वारा रचित कुछ अन्य कविताओं का अध्ययन करें; जैसे-
(क) मैं नीर भरी दुख की बदली
(ख) जो तुम आ जाते एकबार
ये सभी कविताएँ ‘सन्धिनी’ में संकलित हैं।
इस कविता को कंठस्थ करें तथा कक्षा में संगीतमय प्रस्तुति करें।
महादेवी वर्मा को आधुनिक मीरा कहा जाता है। इस विषय पर जानकारी प्राप्त कीजिए।
कवयित्री आस्था का दीप किस तरह जलने की अभिलाषा करती है?
‘मधुर-मधुर मेरे दीपक जल।’ कविता के आधार पर कवयित्री की भक्ति भावना पर प्रकाश डालिए।
| मेरी निश्वासों से द्रुततर, सुभग न तू बुझने का भय कर; मैं अँचल की ओट किए हूँ, अपनी मृदु पलकों से चंचल ! सहज-सहज मेरे दीपक जल ! सीमा ही लघुता का बंधन, है अनादि तू मत घड़ियाँ गिन; मैं दृग के अक्षय कोषों से तुझ में भरती हूँ आँसू जल ! सजल-सजल मेरे दीपक जल ! |
इस पद्यांश पर ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर निम्न शब्द हों।
- सीमा = ______
- आँसू जल = ______
‘भारतीय त्योहारों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण निहित हैं’ इस संदर्भ मे अंतरजाल से जानकारी प्राप्त कीजिए।
