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प्रश्न
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
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लोक साहित्य का सृजक लोक ही है इसीलिए उसमें लोकजीवन की आत्मगाथा समाहित होती है। लोक साहित्य मानव जीवन जितना ही प्राचीन है। अपने जन्म के साथ ही मनुष्य ने कथाएँ कहनी शुरू कर दी थीं- यथार्थपरक भी और काल्पनिक भी। इन कथाओं में उसके अपने अनुभव की कथाएँ हैं। साथ ही अपने तत्कालीन समय और समाज की घटनाओं तथा कथाओं का समावेश है। समय के साथ-साथ समाज में बदलाव की बयार चलती रहती है और समय के साथ कदमताल करते हुए लोक साहित्य में भी बदलाव होता रहा है। लोक साहित्य समय के साथ यात्रा करता आया है और परिवर्तनों को स्वीकारता रहा है। लोक साहित्य की यह सबसे बड़ी खूबसूरती है कि वह परंपराओं का ध्यान रखते हुए भी रूढ़ियों को पकड़कर एक जगह ठहरता नहीं। वह समय के साथ चलता है और समय के सच से साक्षात्कार कराते हुए कभी-कभी समय से आगे चलता भी दिखता है। तभी कहा जाता है कि किसी संस्कृति के संबंध में गहराई से जानने के लिए वहाँ के लोक साहित्य को जानना आवश्यक है। क्योंकि उसमें संस्कृति का सच्चा स्वरूप दृष्टिगोचर होता है। लोक साहित्य में लोकगीत, लोककथा, लोकगाथा, लोकनाट्य आदि सभी रूप शामिल हैं। इनकी भाषा इतनी सहज-सरल-सरस होती है कि वह लोककंठों में बस जाती है। आज के आत्ममुग्ध और आत्म-प्रचार के समय में हम लोक साहित्य सृजकों के आत्म-प्रचार से दूर रहने की मनःस्थिति पर विस्मय ही कर सकते हैं। अपनी प्रसिद्धि, मान-सम्मान या अपने नाम के प्रचार की लालसा का भाव उनमें लेशमात्र भी नहीं था। अपनी रचनाओं में भी वे ऐसा संकेत करने से बचते रहे, जिससे उनकी पहचान की जा सके। अपने नाम के प्रचार के मोह से वे पूरी तरह मुक्त थे। |
(i) लोक साहित्य में बदलाव क्यों होते रहते हैं? (1)
- बदलाव से इनमें नवीनता बनी रहती है।
- इसके आधार, समाज में बदलाव होते रहते हैं।
- मनुष्य की कल्पनाएँ नए-नए रूप धारण करती हैं।
- एक ही तरह का साहित्य नीरसता पैदा करता है।
(ii) लोक साहित्य के संबंध में अनुपयुक्त विकल्प हैं- (1)
- लोक साहित्य का संबंध तत्कालीन समाज की परंपराओं से होता है।
- लोक साहित्य के माध्यम से किसी समाज देश की संस्कृति को जाना जा सकता है।
- लोक साहित्य का सृजन समाज के एक वर्ग विशेष द्वारा किया जाता है।
- लोक साहित्य समय के साथ आ रहे बदलाव के प्रति ग्रहणशील होता है।
(iii) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए: (1)
कथन: लोक साहित्य रूढ़िवाद का समर्थक होता है।
कारण: यथार्थ और कल्पना पर आधारित होने के कारण इनमें बदलाव संभव नहीं है।
- कथन गलत है किंतु कारण सही है।
- कथन और कारण दोनों ही गलत हैं।
- कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है।
- कथन सही है किंतु कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
(iv) लोक साहित्य और संस्कृति को अंतर्संबंधित क्यों बताया गया है? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए। (2)
(v) लोक साहित्य सृजक अन्य साहित्य सृजकों से भिन्न कैसे होते हैं? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए। (2)
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उत्तर
(i) बदलाव से इनमें नवीनता बनी रहती है।
(ii) लोक साहित्य का सृजन समाज के एक वर्ग विशेष द्वारा किया जाता है।
(iii) कथन और कारण दोनों ही गलत हैं।
(iv) लोक साहित्य और संस्कृति को दो कारणों से परस्पर संबंधित बताया गया है-
- लोक साहित्य में संस्कृति का वास्तविक स्वरूप स्पष्ट दिखता है।
- लोक साहित्य का प्रत्यक्ष संबंध तत्कालीन समाज की परंपराओं से होता है। समाज में होने वाले परिवर्तन लोक साहित्य में प्रतिबिंबित दिखते हैं।
(v) लोक साहित्य सृजक अन्य साहित्य सृजकों से निम्न दो बिंदुओं के आधार पर अलग होते हैं-
- लोक साहित्य सृजक रोज़मर्रा के जीवन में प्रयोग की जाने वाली सरल और सहज भाषा में रचना करते हैं।
- लोक साहित्य सृजक प्रसिद्धि, मान-सम्मान अथवा अपने नाम के प्रचार से दूर रहते हैं। यहाँ तक कि वे अपनी रचनाओं में भी अपने नाम का उल्लेख नहीं करते।
