Advertisements
Advertisements
प्रश्न
लेखक ने त्रिपुरा के लोक संगीत का अनुभव कब और कैसे किया?
Advertisements
उत्तर
त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में लेखक की मुलाकात यहाँ के प्रसिद्ध लोकगायक हेमंत कुमार जमातिया से हुई, जो कोकबारोक बोली में गाते हैं। लेखक ने उनसे एक गीत सुनाने का अनुरोध किया। उन्होंने धरती पर बहती नदियों और ताजगी और शांति का गीत सुनाया। इसके अलावा उन्होंने मंजु ऋषिदास से दो गीत सुने ही नहीं बल्कि उनकी शूटिंग भी की।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
लेखिका ने लघु जीव की जान किस तरह बचाई? उसके इस कार्य से आपको क्या प्रेरणा मिलती है?
आज समाज में हामिद जैसों की आवश्यकता है। इससे आप कितना सहमत हैं और क्यों?
“इनसे आप लोग त्याग और हिम्मत सीखें” − गांधीजी ने यह किसके लिए और किस संदर्भ में कहा?
गांधी को समझने वाले वरिष्ठ अधिकारी इस बात से सहमत नहीं थे कि गांधी कोई काम अचानक और चुपके से करेंगे। फिर भी उन्होंने किस डर से और क्या एहतियाती कदम उठाए?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए −
एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए कुल कितने कैंप बनाए गए? उनका वर्णन कीजिए।
तेनजिंग शेरपा की पहली चढ़ाई के बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए।
इस पर्वत का नाम ‘एवरेस्ट’ क्यों पड़ा? जानकारी प्राप्त कीजिए।
निम्नलिखित मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए −
- आड़े हाथों लेना
- अस्त हो जाना
- दाँतों तले अंगुली दबाना
- मंत्र-मुग्ध करना
- लोहे के चने चबाना
काम में रात और दिन के बीच महादेव के लिए शायद ही कोई फर्क रहा हो-कथन के आलोक में उनकी व्यस्त जीवन शैली पर प्रकाश डालिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
आनेवाला समय किस प्रकार के धर्म को नहीं टिकने देगा?
तीसरे दिन की किस सफलता को सुनकर कर्नल खुल्लर खुश हो रहे थे?
लोपसांग ने लेखिका की जान किस तरह से बचाई?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए −
तीसरे दिन सुबह अतिथि ने क्या कहा?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए −
कौन-सा आघात अप्रत्याशित था और उसका लेखक पर क्या प्रभाव पड़ा?
लेखक ने अतिथि का स्वागत किसे आशा में किया?
दूसरे दिन अतिथि के न जाने पर लेखक और उसकी पत्नी का व्यवहार किस तरह बदलने लगता है?
लेखक ने लोगों के किन कार्यों को वाह्याडंबर कहा है और क्यों?
धर्म के बारे में लेखक के विचारों को स्पष्ट करते हुए बताइए कि ये विचार कितने उपयुक्त हैं?
लेखक चलते-पुरज़े लोगों को यथार्थ दोष क्यों मानता है?
