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प्रश्न
लेखक नाटकों में स्त्रियों के प्राकृत बोलने को उनके अपढ़ होने का प्रमाण क्यों नहीं मानता है?
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उत्तर
लेखक नाटकों में स्त्रियों के प्राकृत बोलने को उनके अनपढ़ होने का प्रमाण इसलिए नहीं मानता है क्योंकि
- उस समय का अधिकांश जन समुदाय प्राकृत बोलता है।
- प्राकृत ही उस समय की जन प्रचलित भाषा थी।
- संस्कृत का प्रयोग शिक्षित वर्ग ही करता था।
- अनेक ग्रंथ प्राकृत भाषा में लिखे गए हैं, अत: प्राकृत बोलने वालों को अनपढ़ कैसे कहा जा सकता है।
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