Advertisements
Advertisements
प्रश्न
क्या तुमने कभी किसी को इशारों से बातें करते देखा हैं?
Advertisements
उत्तर
हाँ, मैंने मूक लोंगो तथा स्टेज कलाकारों को इशारों से बातें करते देखा है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
चुप तुम रहो, चुप हम रहें कैसा लगा यह खेल?
क्या बिना बोले नाटक करने में मुश्किल आई?
लोगों को इशारों में बात करने की ज़रूरत कब पड़ती है?
अपने आस-पास के छोटे बच्चों (करीब 6-8 महीने के) को देखो। वे अपनी बात बिना बोले कैसे कहते हैं?
तुम सोच रहे होंगे कि ये कैसे चेहरे हैं? न इनमें आँखें हैं।, न नाक और न ही मुँह। ये सब तो तुम्हें बनाने हैं, पर साथ में जो लिखा है उसे पढ़कर।
यह आफ़ताब है। उसका खिलौना गिर कर टूट गया है। वह दुखी है। कैसा होगा उसका चेहरा?

तुम सोच रहे होंगे कि ये कैसे चेहरे हैं? न इनमें आँखें हैं।, न नाक और न ही मुँह। ये सब तो तुम्हें बनाने हैं, पर साथ में जो लिखा है उसे पढ़कर।
यह जुली है। कल ही उसकी छोटी बहन पैदा हुई है। वह बहुत खुश है। उसका चेहरा बनाओ।

तुम सोच रहे होंगे कि ये कैसे चेहरे हैं? न इनमें आँखें हैं।, न नाक और न ही मुँह। ये सब तो तुम्हें बनाने हैं, पर साथ में जो लिखा है उसे पढ़कर।
यह रेहान है। रेहाना को कुत्तों से बहुत डॉ लगता है। वह खेल रही थी। अचानक उसके सामने एक कुत्ता आ गया। कैसा होगा रेहाना का चेहरा?

नाच से भी हम अपनी बात दूसरों तक पहुँचा सकते हैं। नाच में इशारों और चेहरे के हाव-भाव का इस्तेमाल करते हैं। इन्हें मुद्राएँ कहते हैं।
नीचे चित्र में नाच की कुछ मुद्राएँ दी हैं इन्हें देखो और करो।
नाच की कुछ मुद्राएँ तुम भी सीखो और करके दिखाओ।

चित्रों को देखकर अनुमान लगाओ, इन पर अपने मन से कहानी बनाओ तथा अपने साथियों को सुनाओ और उस कहानी पर बातचीत भी करो।

