Advertisements
Advertisements
प्रश्न
क्या अनुन्मील्य पुष्पों में परपरागण सम्पन्न होता है? अपने उत्तर की सतर्क व्याख्या करें।
Advertisements
उत्तर
अनुन्मील्य पुष्पों में परपरागण नहीं हो सकता। अनुन्मील्य पुष्प कभी भी अनावृत नहीं होते हैं। इन पुष्पों में, परागकोश और वर्तिकाग्र एक दूसरे के बिल्कुल नजदीक स्थित होते हैं; जब पुष्प कलिका में परागकोश स्फुटित होते हैं तब परागकण वर्तिकाग्र के सम्पर्क में आकर परागण को प्रभावित करते हैं। परिणामस्वरूप, ये पुष्प हमेशा स्वपरागित होते हैं क्योंकि वे बंद रहते हैं, और वर्तिकाग्र पर पर-परागण के उतरने की कोई संभावना नहीं होती। अनुन्मील्य परागणी पुष्प परागण कर सकते हैं और परागणकों के बिना बीज लगा सकते हैं।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
निम्नलिखित शब्दावलियों को सही विकासीय क्रम में व्यवस्थित करें-
परागकण, बीजाणुजन ऊतक, लघुबीजाणु चतुष्क, परागमातृ कोशिका, नर युग्मक।
आप मादा युग्मकोभिद् के एकबीजाणुज विकास से क्या समझते हैं?
एक स्पष्ट एवं साफ-सुथरे चित्र के द्वारा परिपक्व मादा युग्मकोद्भिद के 7-कोशीय, 8-न्युकिलयेट (केंद्रक) प्रकृति की व्याख्या करें।
उन्मील परागणी पुष्पों से क्या तात्पर्य है?
विपुंसन से क्या तात्पर्य है?
लघुबीजाणुधानी तथा गुरुबीजाणुधानी के बीच अन्तर स्पष्ट करें।
इनमें विभेद करें –
बीजपत्राधार तथा बीजपत्रोपरिक
लघुबीजाणुधानी तथा गुरूबीजांणुधानी घटनाओं के दौरान किस प्रकार का कोशिका विभाजन संपन्न होता है?
स्व-अयोग्यता वाली प्रजातियों में स्व-परागण प्रक्रिया बीज की रचना तक क्यों नहीं पहुँच पाती है?
एक पादप प्रजनक कब और क्यों विपुंसन तकनीक का प्रयोग करता है?
