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प्रश्न
कल्पना कीजिए कि एक तितली काँटे से मित्रता करना चाहती है, उनके बीच कैसा संवाद होगा?
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उत्तर
तितली: नमस्ते काँटा जी! मैं आपसे मित्रता करना चाहती हूँ।
काँटा: मित्रता? मुझसे? लोग तो मुझे देखते ही दूर भाग जाते हैं। मैं तो सबकी उँगलियाँ छेद देता हूँ।
तितली: पर मैंने जाना है कि आपकी कठोरता के पीछे भी दया छिपी है। आप अपने पौधे की रक्षा करते हैं और फूलों को टूटने से बचाते हैं।
काँटा: सच कहा! लोग केवल मेरा चुभना देखते हैं, मेरी रक्षा करने वाली नेकी को नहीं पहचानते। तुमने तो मेरा असली गुण देख लिया।
तितली: इसीलिए आप फूल की रक्षा किया करो, और मैं फूल से प्रेम करके उसमें जान भर दिया करूँ। हम दोनों मिलकर इस पौधे की सेवा कर सकते हैं।
काँटा: बहुत अच्छा! आज से हम पक्के मित्र हैं।
इस संवाद से यह सीख मिलती है कि किसी में अच्छाई खोजनी चाहिए, क्योंकि कठोरता के पीछे भी अक्सर दया और रक्षा का भाव छिपा होता है।
