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प्रश्न
कचरा बीनने वाले से संवाद कीजिए और मुख्य मुद्दे बताइए।
विस्तार में उत्तर
लेखन कौशल
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उत्तर
कचरा बीनने वाले (रामू) और एक छात्र (अमित) के बीच संवाद:
| अमित: | नमस्ते भैया! जरा दो मिनट रुकेंगे? मैं आपसे कुछ बात करना चाहता हूँ। |
| रामू: | (सकुचाते हुए) हाँ छोटे बाबू, बोलो। मुझे जल्दी कचरा इकट्ठा करना है, नहीं तो बड़ी गाड़ी निकल जाएगी। |
| अमित: |
भैया, आपका नाम क्या है? और आप रोज़ कितने घंटे यह काम करते हैं?
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| रामू: |
मेरा नाम रामू है। मैं सुबह ४ बजे ही घर से निकल जाता हूँ और दोपहर तक कचरा बीनने का काम करता हूँ। लगभग ७-८ घंटे लग जाते हैं।
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| अमित: | क्या आप ग्लव्स (दस्ताने) या जूते नहीं पहनते? काँच या सूई चुभने का डर नहीं रहता? |
| रामू: |
(मुस्कुराते हुए) बाबूजी, आदत हो गई है। कई बार काँच और जंग लगी कीलें चुभती हैं, खून भी निकलता है, पर हमारे पास इतने पैसे कहाँ कि रोज़ नए दस्ताने खरीदें।
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| अमित: |
यह तो बहुत खतरनाक है! आपको इस काम से रोज़ की कितनी कमाई हो जाती है?
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| रामू: | रोज़ का मुश्किल से १५० से २०० रुपया मिल पाता है। प्लास्टिक, लोहा और गत्ता अलग करके कबाड़ी को बेचते हैं, तब जाकर चूल्हा जलता है। |
| अमित: | क्या आपके बच्चे स्कूल जाते हैं? |
| रामू: |
बड़ा बेटा मेरे साथ ही हाथ बंटाता है, पर छोटी बेटी को सरकारी स्कूल भेजने की कोशिश कर रहा हूँ। सोचता हूँ हमारी तरह उसकी ज़िंदगी गंदे कचरे में न बीते।
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| अमित: |
रामू भैया, आप हमारे पर्यावरण को साफ रखने में बहुत मदद करते हैं। हम लोग घर से ही सूखा और गीला कचरा अलग करके देंगे, ताकि आपको आसानी हो। अपना ख्याल रखिएगा।
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| रामू: |
धन्यवाद बाबूजी! अगर सब लोग कचरा अलग कर दें, तो हमारे लिए काम बहुत आसान और सुरक्षित हो जाएगा।
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कचरा बीनने वालों से जुड़े मुख्य मुद्दे:
- स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे: बिना सुरक्षा उपकरणों (दस्ताने, मास्क, जूते) के काम करने के कारण इन्हें त्वचा रोग, सांस की बीमारियाँ और टिटनेस जैसी घातक चोटों का खतरा हमेशा बना रहता है।
- आर्थिक शोषण: दिनभर कड़ी धूप और गंदगी में मेहनत करने के बाद भी इन्हें बहुत कम मजदूरी मिलती है। कबाड़ी अक्सर इनके लाए सामान की सही कीमत नहीं देते।
- सामाजिक उपेक्षा और हीन भावना: समाज में इन्हें सम्मान की नज़र से नहीं देखा जाता। लोग इनसे दूरी बनाकर रखते हैं और कई बार इन्हें शक की निगाह से भी देखा जाता है।
- शिक्षा का अभाव और बाल श्रम: अत्यधिक गरीबी के कारण इनके बच्चे बुनियादी शिक्षा से वंचित रह जाते हैं और कम उम्र में ही इसी दलदल (कचरा बीनने के काम) में फंस जाते हैं।
- कचरे के वर्गीकरण की कमी: घरों से गीला, सूखा और खतरनाक कचरा (काँच, एक्सपायर्ड दवाइयाँ, सूई) एक साथ फेंक दिया जाता है। इस वजह से इन्हें नंगे हाथों से कचरा छांटने में बहुत परेशानी और जान का जोखिम होता है।
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