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कबीर की साखियों को याद कीजिए और कक्षा में अंत्याक्षरी में उनका प्रयोग कीजिए।

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प्रश्न

कबीर की साखियों को याद कीजिए और कक्षा में अंत्याक्षरी में उनका प्रयोग कीजिए।

कृति
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उत्तर

कबीर की साखियों द्वारा अंत्याक्षरी

कक्षा को दो या अधिक समूहों में बाँटकर प्रत्येक समूह बारी-बारी से कबीर की एक साखी सुनाए। अगली साखी पिछली साखी की अंतिम ध्वनि शब्द से आरंभ की जा सकती है।

अंत्याक्षरी के लिए साखियों का क्रम

समूह 1: ऐसी बानी बोलिये, मन का आपा खोइ।
अपना तन सीतल करै, औरन को सुख होइ॥

समूह 2: ऐसी बानी बोलिये, मन का आपा खोइ।
अपना तन सीतल करै, औरन को सुख होइ॥

समूह 1: कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढै बन माँहि।
ऐसे घटि-घटि राम हैं, दुनिया देखै नाँहिं॥

समूह 2: जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहिं।
सब अँधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्या माँहि॥

समूह 1: सुखिया सब संसार है, खायै अरु सोवै।
दुखिया दास कबीर है, जागै अरु रोवै॥

समूह 2: बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र लागै कोइ।
राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होइ॥

समूह 1: निंदक नेड़ा राखिये, आँगणि कुटी बँधाइ।
बिन साबण पाणी बिना, निर्मल करै सुभाइ॥

समूह 2: पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा, पंडित भया न कोइ।
ऐके अषिर पीव का, पढ़ै सु पंडित होइ॥

समूह 1: हम घर जाल्या आपणाँ, लिया मुराड़ा हाथि।
अब घर जालौं तास का, जे चलै हमारे साथि॥

नियम

  1. प्रत्येक समूह को साखी सुनाने के लिए निश्चित समय दिया जाए।

  2. साखी शुद्ध उच्चारण और सही क्रम से सुनानी होगी।

  3. भूल होने पर अवसर दूसरे समूह को दिया जाएगा।

  4. सबसे अधिक साखियाँ सही सुनाने वाला समूह विजेता होगा।

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साखी
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 1.1: साखी - परियोजना कार्य [पृष्ठ ६]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
अध्याय 1.1 साखी
परियोजना कार्य | Q 2. | पृष्ठ ६

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मीठी वाणी बोलने से औरों को सुख और अपने तन को शीतलता कैसे प्राप्त होती है?


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भाव स्पष्ट कीजिए −

बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ।


भाव स्पष्ट कीजिए−
जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि।


कस्तूरी के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।


ऐसी बाँणी बोलिये’ के माध्यम से कबीर कैसी वाणी बोलने की सीख दे रहे हैं और क्यों?


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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए:

कबीर ने निंदक को पास रखने की सलाह क्यों दी है? क्या यह सलाह आपको उचित प्रतीत होती है? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उचित उत्तर वाले विकल्‍प चुनकर लिखिए:

सुखिया सब संसार है, खायै अरू सोवै।
दुखिया दास कबीर है, जागै अरू रोवै।।
बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ।
राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बोरा होइ।।
  1. कबीरदास जी क्यों दुःखी हैं?
    (a) ईश्वर से बिछुड़ने के कारण।
    (b) ईश्वर को प्राप्त न कर सकने के कारण।
    (c) विषय-वासनाओं में लिप्त मनुष्यों को देखकर।
    (d) ईश्वर भजन में लिप्त मनुष्यों को देखकर।
  2. 'सोना' और 'जागना' क्रमशः किसके प्रतीकार्थ हैं?
    (a) निद्रा और अनिद्रा के
    (b) अंधकार और प्रकाश के
    (c) अज्ञान और ज्ञान के
    (d) दुःख और सुख के 
  3. किस व्यक्ति पर 'मंत्र' का कोई प्रभाव नहीं दिखाई देता?
    (a) जिसका मन सांसारिक विषय-वासनाओं में लिप्त हो।
    (b) जिसका मन अहंकार की भावना से भरा हो।
    (c) जिसके मन में विरह रूपी सर्प ने घर बसा लिया हो।
    (d) जिसके मन में मिलन रूपी सर्प ने घर बसा लिया हो।
  4. कबीरदास जी के अनुसार 'बौरा' कौन है?
    (a) जिसे प्रभु का साक्षात्कार हो गया है।
    (b) जो प्रभु से विलग रहना चाहता है।
    (c) जो प्रभु की दिन-रात सेवा कर रहा है।
    (d) जो प्रभु के वियोग में जीवन व्यतीत कर रहा है।
  5. 'मंत्र न लगना' का अर्थ हैः
    (a) पीड़ित व्यक्ति का स्वस्थ न होना
    (b) विष का प्रभाव कम न होना
    (c) मंत्र सिद्ध न होना
    (d) कोई उपाय काम न आना

कबीर के अनुसार मीठी बोली का क्या प्रभाव होता है?

  1. हमारा शरीर शीतल होता है।
  2. बोली में अहं का भाव आता है।
  3. हमारा काम सरलतापूर्वक हो जाता है।
  4. सुनने वाले को सुखानुभूति होती है।

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