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काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए- श्रमित स्वप्न की मधुमाया तान उठाई।

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प्रश्न

काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-

श्रमित स्वप्न की मधुमाया ........... तान उठाई।

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उत्तर

इस काव्यांश की विशेषता है कि इसमें स्मृति बिंब बिखरा पड़ा है। देवसेना स्मृति में डूबी हुई है। उसे वे दिन स्मरण हो आते हैं, जब उसने प्रेम को पाने के लिए अथक प्रयास किए थे परन्तु वह असफल रही। अब उसे अचानक उसी प्रेम का स्वर सुनाई पड़ रहा है। यह उसे चौंका देता है। विहाग राग का उल्लेख किया गया है। इसे आधी राती में गाया जाता है। स्वप्न को कवि ने श्रम रूप में कहकर गहरी व्यंजना व्यक्त की है। स्वप्न को मानवी रूप में दर्शाया है। गहन-विपिन एवं तरु-छाया में समास शब्द हैं। इन पंक्तियों के मध्य देवसेना की असीम वेदना स्पष्ट रूप से दिखती है।

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देवसेना का गीत
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अध्याय 1.01: जयशंकर प्रसाद (देवसेना का गीत, कार्नेलिया का गीत) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ५]

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एनसीईआरटी Hindi Antara Bhag 2 [English] Class 12
अध्याय 1.01 जयशंकर प्रसाद (देवसेना का गीत, कार्नेलिया का गीत)
प्रश्न-अभ्यास | Q 4. (क) | पृष्ठ ५
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