हिंदी
महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (हिंदी माध्यम) १० वीं कक्षा

जोड़ियाँ मिलाइए : अ उत्‍तर आ धर्मयुग ______ मारिचिका सोनार बाँग्‍ला ______ अंग्रेजी लेख एशिया ______ पहली रचना नटखट ______ मैं मुर्गा हूँ

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

जोड़ियाँ मिलाइए :

अ उत्‍तर आ
धर्मयुग ______ मारिचिका
सोनार बाँग्‍ला ______ अंग्रेजी लेख
एशिया ______ पहली रचना
नटखट ______ मैं मुर्गा हूँ
जोड़ियाँ मिलाइएँ
Advertisements

उत्तर

अ उत्‍तर
धर्मयुग मैं मुर्गा हूँ
सोनार बाँग्‍ला मारिचिका
एशिया अंग्रेजी लेख
नटखट पहली रचना
shaalaa.com
बातचीत
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 2.08: बातचीत - स्‍वाध्याय [पृष्ठ ९८]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Kumarbharati Standard 10 Maharashtra State Board
अध्याय 2.08 बातचीत
स्‍वाध्याय | Q (४) | पृष्ठ ९८

संबंधित प्रश्न

एक-दो शब्‍दों में उत्‍तर लिखिए :

शिवानी का वास्‍तविक नाम - ______ 


एक-दो शब्‍दों में उत्‍तर लिखिए :

शिवानी की प्रिय रचना - ______ 


कोष्ठक में दी हुई क्रिया की सहायता से रिक्त स्थान की पूर्ति करो।

पुल्लिंग:

तुम केला ______ (खा) 


कोष्ठक में दी हुई क्रिया की सहायता से रिक्त स्थान की पूर्ति करो। पुल्लिंग:

हम विद्यालय ______ (जाना) 


कोष्ठक में दी हुई क्रिया की सहायता से रिक्त स्थान की पूर्ति करो। स्त्रीलिंग:

तुम कबड्डी ______ (खेल) 


नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।

नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।

शीला गाना गाती है।(नाचना)


नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।

नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।

पिता जी सवेरे टहलते हैं। (तैरते)


मैं शाम को ______ क्रिकेट खेलता हूँ।


अंत्याक्षरी खेलना क्यों चाहता है? 


निम्नलिखित गदयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

दुर्गा प्र. नौटियालः  आपने अब तक काफी साहित्‍य रचा है। क्‍या आप इससे संतुष्‍ट हैं? 
शिवानी: जहाँ तक संतुष्‍ट होने का संबंध है, मैं समझती हूँ कि किसी को भी अपने लेखन से संतुष्‍ट नहीं होना चाहिए। मैं चाहती हूँ कि ऐसे लक्ष्य को सामने रखकर कुछ ऐसा लिखूँ कि जिस परिवेश को पाठक ने स्‍वयं भोगा है, उसे जीवंत कर दूँ। मुझे तब बहुत ही अच्छा लगता है जब कोई पाठक मुझे लिख भेजता है कि आपने अमुक-अमुक चरित्र का वास्‍तविक वर्णन किया है अथवा फलाँ-फलाँ चरित्र, लगता है, हमारे ही बीच है। लेकिन साथ ही मैं यह मानती हूँ कि लोकप्रिय होना न इतना आसान है और न ही उसे बनाए रखना आसान है। मैं गत पचास वर्षों से बराबर लिखती आ रही हूँ। पाठक मेरे लेखन को खूब सराह रहे हैं। मेरे असली आलोचक तो मेरे पाठक हैं, जिनसे मुझे प्रशंसा और स्‍नेह भरपूर मात्रा में मिलता रहा है। शायद यही कारण है कि मैं अब तक बराबर लिखती आई हूँ।
  1. कृति पूर्ण कौजिए:   (2)



  2. 'परिवेश का प्रभाव व्यक्तित्व पर होता है' विषय 25 से 30 शब्दों अपने विचार लिखिए।   (2)

Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×