Advertisements
Advertisements
प्रश्न
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
|
जलवायु परिवर्तन के साथ जैसे-जैसे मौसम का ‘पैटर्न’ समुद्र के स्तर को प्रभावित कर रहा है, नदी प्रणालियों में भूकम्प से होने वाले महाविनाशकारी परिवर्तनों को समझना अपरिहार्य हो चला है। धरती लगातार हिल रही है। पहाड़ों में दरारें पड़ रही हैं। नदियाँ वैसे भी, विशेष रूप से मार्ग और प्रवाह में परिवर्तन के प्रति संवेदनशील होती हैं। भूकम्प से नदी मार्ग में परिवर्तन के विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं, जिससे संपत्ति, कृषि और बुनियादी ढाँचे को भारी नुकसान पहुँच सकता है। हाल में, जब अध्येताओं की एक टीम ने ढाका से सौ किलोमीटर दक्षिण में नदी की पुरानी मुख्यधारा खोजने के लिए सैटेलाइट चित्रों का इस्तेमाल किया तो उस इलाके में भूकम्पीय संकेत-चिन्ह मिले। इस क्षेत्र में गंगा और ब्रह्मपुत्र की प्लेटें करीब होने से यहाँ अकसर तेज भूकम्प आते रहे हैं । डेल्टा वाले नदी क्षेत्र में उच्च तीव्रता का भूकम्प आने पर प्रवाह का रास्ता पूरी तरह बदल सकता है। वहाँ तबाही इसलिए बहुत भयावह होगी, क्योंकि अब उस क्षेत्र में लाखों की घनी बसावट है। भूकम्पीय गतिविधियों और नदियों के प्रवाह पर बारीक नजर रखे हुए वैज्ञानिक लगातार ऐसे जोखिम वाले तमाम वैश्विक क्षेत्रों की पहचान करने में जुटे हैं। सब कुछ के बावजूद, किसी भूकम्प के सटीक मापदंडों या किसी भी क्षण नदी के बहाव के बारे में पूर्वानुमान लगाना असंभव है। |
(i) निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए। दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए: (1)
कथन: नदी प्रणालियों में भूकम्पीय विनाशकारी बदलावों को समझना अनिवार्य हो गया है।
कारण: भूकम्प से नदी मार्ग में परिवर्तन के विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं।
विकल्प:
- कथन और कारण दोनों गलत हैं।
- कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
- कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है।
- कथन गलत है किंतु कारण सही है।
(ii) अध्ययनकर्ताओं को ढाका के दक्षिण में नदी की मुख्यधारा खोजते हुए क्या जानकारी मिली? (1)
- उस क्षेत्र के पहाड़ों में दरारें मिलीं।
- उस क्षेत्र की संवेदनशीलता की जानकारी मिली।
- नदी की पुरानी मुख्यधारा इस क्षेत्र से गायब हो चुकी है।
- उस इलाके में नदी की पुरानी मुख्यधारा के संकेत-चिन्ह मिले।
(iii) डेल्टा वाले क्षेत्र में तीव्र भूकम्प आने से होगा: (1)
- नदी-मार्ग बदल सकता है।
- भयानक तबाही होगी।
- उन क्षेत्रों में घनी बसावट हो सकती है।
- वहाँ अकसर तेज भूकम्प आते रहेंगे।
विकल्प:
- I - II
- II - III
- III - IV
- I - IV
(iv) भूकम्प के सटीक मापदंड और नदी के बहाव का पूर्वानुमान लगाना असंभव क्यों है? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए। (2)
(v) पृथ्वी में हो रही लगातार भीतरी हलचल के कौन-से परिणाम हो रहे हैं और हो सकते हैं? (2)
Advertisements
उत्तर
(i) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है।
(ii) उस क्षेत्र की संवेदनशीलता की जानकारी मिली।
(iii) I - II
(iv)
- सामान्य रूप से निरंतर भूकम्पों के प्रभाव से पृथ्वी में होने वाले कम्पन के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में दरारें पड़ना तथा नदियों के मार्ग में परिवर्तन होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। डेल्टाई क्षेत्रों में भी यदि भूकम्प की तीव्रता अधिक हो, तो ऐसी घटनाएँ संभव हैं।
- सैटेलाइट चित्रों के माध्यम से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि इस क्षेत्र में पहले भी भूकम्प आते रहे हैं, किंतु इस विषय में निश्चित रूप से कुछ कहना कठिन है। यदि ऐसा होता है, तो इसके परिणाम निश्चित रूप से अत्यंत विनाशकारी होंगे।
(v) पृथ्वी के आंतरिक भाग में निरंतर होने वाली हलचलों के कारण उसके बाहरी भाग में अनेक परिवर्तन देखने को मिलते हैं, जैसे नदियों के प्रवाह का अवरुद्ध होना या उनका मार्ग बदल जाना तथा पर्वतीय क्षेत्रों में दरारें पड़ जाना। इन परिवर्तनों के परिणामस्वरूप पृथ्वी के पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और जलप्लावन जैसी आपदाएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं।
