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जब जमाल साहब और नसीरुद्दीन हुसैन साहब के घर से बाहर निकले तो उन्होंने अपनी बेगम को नसीरुद्दीन और जमाल साहब से मुलाकात का किस्सा सुनाया।

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प्रश्न

जब जमाल साहब और नसीरुद्दीन हुसैन साहब के घर से बाहर निकले तो उन्होंने अपनी बेगम को नसीरुद्दीन और जमाल साहब से मुलाकात का किस्सा सुनाया। उन दोनों के बीच में क्या बातचीत हुई होगी? लिखकर बताओ।

बेगम – कौन आया था?

हुसैन साहब – नसीरुद्दीन अपने दोस्त के साथ आया था।

बेगम – __________________

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

बेगम – दोस्त का नाम क्या था?

हुसैन – जमाल । वह उसका बहुत पुराना दोस्त था।

बेगम – तब, क्या-क्या बातें हुई?

हुसैन – तुम तो जानती ही हो नसीरुद्दीन को। क्या खूब इंसान है।

बेगम – इसका मतलब है उसने फिर कुछ मजेदार बात कही होगी।

हुसैन – हाँ, हाँ तुमने ठीक अनुमान लगाया। नसीरुद्दीन अपने दोस्त जमाल का परिचय कराते समय कह रहा था कि इन्होंने (जमाल ने अपनी ही अचकन पहन रखी है।

बेगम – तब तो जमाल साहब जरूर नसीरुद्दीन का ही अचकन पहनकर घूमने निकले होंगे।

हुसैन – मुझे भी ऐसा ही लगता है।

बेगम – तब तो जमाल साहब जरूर नाराज हुए होंगे।

हुसैन – उनके चेहरे से तो ऐसा ही लग रहा था।

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दोस्त की पोशाक
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अध्याय 5: दोस्त की पोशाक - दोस्त की पोशाक [पृष्ठ ३९]

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एनसीईआरटी Hindi - Rimjhim Class 4
अध्याय 5 दोस्त की पोशाक
दोस्त की पोशाक | Q 1. | पृष्ठ ३९

संबंधित प्रश्न

नसीरुद्दीन और जमाल साहब बनठन कर घूमने के लिए निकले।

तुम बनठन कर कहाँ-कहाँ जाते हो?


नसीरुद्दीन और जमाल साहब बनठन कर घूमने के लिए निकले।

तुम किस-किस तरह से बनते-ठनते हो?


तीसरे मकान से बाहर निकलकर जमाल साहब ने नसीरुद्दीन से क्या कहा होगा?


जमाल साहब अपने मामूली से कपड़ों में घूमने क्यों नहीं जाना चाहते होंगे?


नसीरुद्दीन अपनी अचकन के बारे में हमेशा क्यों बताते होंगे?


नसीरुद्दीन ने कहा, “चलो दोस्त, मोहल्ले में घूम आएँ।”

जब नसीरुद्दीन अपने दोस्त से मिले, वे उसे अपना मोहल्ला दिखाने ले गए।

जब तुम अपने दोस्तों से मिलते हो, तब क्या-क्या करते हो?


नीचे कुछ वाक्य लिखे हैं। तुम्हें इनका अभिनय करना है। तुम चाहो तो कहानी में देख सकते हो कि इन कामों का ज़िक्र कहाँ आया है।

  • बनठन कर घूमने के लिए निकलना।
  • घड़ों पानी पड़ना।
  • मुँह बनाकर शिकायत करना।
  • गर्मजोशी से स्वागत करना।
  • नाराज़ होना।
  • देखते ही रह जाना।

घड़ों पानी पड़ना इस मुहावरों को सुनकर मन में एक चित्र सा बनता है। तुम भी किन्हीं दो मुहावरों के बारे में चित्र बनाओ। कुछ मुहावरे हम दे देते हैं। तुम चाहो तो इनमें से कोई पसंद कर सकते हो-

  • सिर मुंडाते ही ओले पड़ना
  • ऊँट के मुँह में जीरा
  • दीया तले अँधेरा
  • ईद का चाँद

पड़ोस के घर में जाकर नसीरुद्दीन पड़ोसी से मिले।

तुम अपने पड़ोसी बच्चों के साथ बहुत-से खेल खेलते हो। पर क्या तुम उनके परिवार के बारे में जानते हो?

चलो, दोस्तों के बारे में और जानकारी इकट्ठी करते हैं। यदि तुम चाहो तो उनसे ये बातें पूछ सकते हो-

  • घर में कुल कितने लोग हैं?
  • उनके नाम क्या हैं?
  • उनकी आयु क्या है?
  • वे क्या काम करते हैं?

इस सूची में तुम अपने मन से बहुत-से सवाल जोड़ सकते हो।


झूठा – जूठा

इन शब्दों को बोलकर देखो। ये मिलती-जुलती आवाज़ वाले शब्द हैं। ज़रा से अंतर से भी शब्द का अर्थ बदल जाती है।

नीचे इसी तरह का कुछ शब्द का जोड़ा दिया गया हैं। इसका अर्थ अलग हैं। इस शब्द का वाक्य में प्रयोग करो।

घड़ा - गढ़ा


झूठा – जूठा

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घूम - झूम


झूठा – जूठा

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राज - राज़


झूठा – जूठा

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सजा - सज़ा


झूठा – जूठा

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खोल - खौल 


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