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प्रश्न
हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
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उत्तर
यह चर्चा के लिए दी गई गतिविधि है। चर्चा का नमूना उत्तर: मैंने ये उत्तर कुंडलियों की पंक्तियों के आधार पर चुने। “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय। काम बिगारे आपनो…” से साफ है कि बिना सोचे-समझे किया गया काम बिगड़ जाता है और वही काम जी में खटकता रहता है, जिससे चित्त को चैन नहीं मिलता। “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ” तथा “आगे को सुख होइ समुझि बीती सो बीती” से साफ है कि अतीत को भुलाकर भविष्य पर ध्यान देना चाहिए। “जो बनि आवै सहज में ताही में चित देइ” से साफ है कि सहज रूप से बनने वाले काम पर ही मन लगाना चाहिए। अगर किसी साथी ने अलग उत्तर चुना हो, तो हम उसका कारण पूछेंगे और उसे कुंडलियों की संबंधित पंक्तियों से मिलाकर देखेंगे कि कौन-सा उत्तर कविता के अर्थ से सबसे अधिक मेल खाता है। इस तरह मिलकर चर्चा करने से सभी को सही उत्तर समझ आ जाएगा।
