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प्रश्न
“हम स्वच्छंद और क्यों तुमने, डाली है बेड़ी पग में?” पक्षी को स्वच्छंद और मनुष्य को बेड़ियों में क्यों बताया गया है?
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उत्तर
पक्षी स्वच्छंद (अर्थात पूर्ण स्वतंत्र) इसलिए कहा गया है क्योंकि आसमान ही उनका घर है। वे सीमा-हीन गगन में निर्भय होकर उड़ते हैं और जहाँ चाहें, उड़कर चले जाते हैं। उन पर किसी प्रकार का बंधन नहीं है। उनके मन में लोभ, पाप और परवाह नहीं होती। वे सब पक्षियों के साथ मिल-जुलकर प्रेम और प्रीति से रहते हैं। इसीलिए वे शरीर और मन दोनों से स्वतंत्र हैं।
दूसरी ओर, मनुष्य को बेड़ियों में जकड़ा हुआ इसलिए बताया गया है क्योंकि वह अपने ही बनाए बंधनों लोभ, लालच, स्वार्थ, ईर्ष्या, द्वेष और बढ़ती हुई आवश्यकताओं में बँध गया है। ये बंधन उसकी 'सोने की कड़ियाँ' हैं, जो उसे मानवता से दूर कर देते हैं। वह दूसरों की कमाई से अपना घर भरने की सोचता है और दूसरों के प्रति द्रोह की भावना रखता है। इन्हीं कारणों से मनुष्य 'जग का बंदी' बन गया है, जबकि पक्षी इन सब बंधनों से मुक्त होकर खुशी-खुशी जीवन जीते हैं। इसीलिए चिड़िया मनुष्य को अपनी सोने की कड़ियाँ तोड़ने और द्रोह-भावना छोड़ने का मुक्ति-मंत्र सुनाती है।
