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प्रश्न
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हितेश ने हाल ही में एक वस्त्र निर्माणी कम्पनी आरम्भ की थी। लेकिन, उसने जल्द ही बहुत-सी समस्याओं का सामना करना आरम्भ कर दिया जैसे लक्ष्यों का प्राप्त न होना, प्रबन्धकों के मध्य संघर्ष, श्रम की उच्च आवर्त दर आदि। उसने यह पता लगाने के लिए कि क्या ग़लत हो रहा था, एक प्रबन्ध परामर्शदाता को काम पर रखा। परामर्शदाता ने जांच-पड़ताल की और निम्नलिखित राय (टिप्पणी) दी:
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फेयोल द्वारा दिए गए प्रबन्ध के उन दो सिद्धान्तों को पहचानिए एवं समझाइए जिनका पालन हितेश की कम्पनी में नहीं किया जा रहा है।
विस्तार में उत्तर
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उत्तर
हितेश की कम्पनी में प्रबन्ध के जिन दो सिद्धान्तों का पालन नहीं किया जा रहा है, वे हैं:
- अधिकार और उत्तरदायित्व का अनुपात: फेयोल के सिद्धान्त के अनुसार, प्रबंधन में अधिकार और उत्तरदायित्व का अनुपात होना चाहिए। इसका मतलब है कि किसी भी व्यक्ति को कार्य सौंपने के साथ-साथ उन्हें निर्णय लेने का अधिकार भी दिया जाना चाहिए। हितेश की कम्पनी में कामगार, उत्पादन प्रबंधक और विपणन प्रबंधक दोनों से आदेश प्राप्त कर रहे थे। इस स्थिति में, कर्मचारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिल पा रहे थे, और कार्यों के संबंध में भ्रांति उत्पन्न हो रही थी। इसका परिणाम यह हुआ कि कर्मचारियों के बीच कार्यों को लेकर कंफ्यूजन था, जो संगठनात्मक उद्देश्य को प्राप्त करने में रुकावट डालता है।
- न्याय और समानता का सिद्धान्त: फेयोल के सिद्धान्त के अनुसार, समानता और न्याय का पालन होना चाहिए। सभी कर्मचारियों को समान अवसर मिलना चाहिए, और उनके साथ न्यायपूर्ण व्यवहार होना चाहिए। हितेश की कम्पनी में केवल महिला कर्मचारियों को ही पदोन्नति दी जा रही थी, जबकि अन्य कर्मचारियों को पदोन्नति के समान अवसर नहीं मिल रहे थे। यह समानता और न्याय के सिद्धान्त का उल्लंघन है। ऐसी स्थिति से कर्मचारियों में असंतोष और भेदभाव की भावना उत्पन्न हो सकती है, जो संगठन की कार्यप्रणाली को प्रभावित करती है।
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