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प्रश्न
हीरा और मोती की दैनंदिनी
कहानी में हीरा और मोती आपस में मनुष्यों की तरह बातें करते दिखते हैं। कल्पना कीजिए कि वे लिख-पढ़ भी सकते हैं। हीरा या मोती की नजर से उस दिन की डायरी लिखिए जब उन्हें काँजीहाउस ले जाया गया।
कैसे लिखें-
- "आज का दिन..." से आरंभ करें।
- भावनाएँ लिखें (भूख, गुस्सा, दर्द)।
- अंत में आशा या संकल्प लिखें।
(संकेत- “आज हमें काँजीहाउस में बंद किया गया। भूख से पेट जल रहा है। पर विश्वास है कि झूरी हमें वापस ले जाएगा।”)
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उत्तर
दिनांक: 15 सितंबर
दिन: सोमवार
समय: रात्रि 9:30 बजे
आज का दिन हमारे जीवन का सबसे दुर्भाग्यपूर्ण और भयानक दिन था। मटर के खेत में पकड़े जाने के बाद रखवालों ने हमें बेरहमी से मारा और इस अंधेरे, बदबूदार काँजीहाउस में बंद कर दिया। यहाँ का दृश्य देखकर दिल दहल जाता है; चारों तरफ घोड़े, गधे, बकरियाँ और भैंसें मुरदों की तरह पड़े हैं। सुबह से एक तिनका तक खाने को नहीं मिला है, भूख से पेट जल रहा है और दीवारों की नमकीन मिट्टी चाटने पर विवश होना पड़ रहा है। मन में इन अत्याचारियों के प्रति भयंकर गुस्सा उबल रहा है, किंतु लाठी की चोटों का दर्द और गले में बँधी मजबूत रस्सी हमें विवश कर रही है। मोती भी दर्द और क्षोभ से तड़प रहा है। लेकिन विपत्ति की इस काली रात में भी मेरा हौसला टूटा नहीं है। हमें दृढ़ विश्वास है कि हमारे स्नेहशील मालिक झूरी को हमारी सुध अवश्य आएगी और वह हमें इस नर्क से छुड़ाकर वापस अपने घर ले जाएगा।
