हिंदी

हमारे यहाँ बहुत से काम लोग खुद नहीं करके किसी पेशेवर कारीगर से करवाते हैं। लेकिन गाँधी जी पेशेवर कारीगरों के उपयोग में आनेवाले औज़ार - छेनी, हथौड़े, बसूले क्यों खरीदना चाहते होंगे? - Hindi (हिंदी)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

हमारे यहाँ बहुत से काम लोग खुद नहीं करके किसी पेशेवर कारीगर से करवाते हैं। लेकिन गाँधी जी पेशेवर कारीगरों के उपयोग में आनेवाले औज़ार - छेनी, हथौड़े, बसूले क्यों खरीदना चाहते होंगे?

टिप्पणी लिखिए
Advertisements

उत्तर

गाँधी जी के मन में आश्रम के प्रत्येक व्यक्ति को स्वावलंबी बनाने की बात रही होगी क्योंकि जिन औज़ारों का ज़िक्र किया गया है, वे बढ़ई के कार्य अर्थात्‌ लकड़ी का सामान बनाने के काम में आता है। गाँधी जी अहमदाबाद में एक आश्रम खोलने का प्रयास कर रहे थे। वे चाहते थे कि आश्रम में सारा काम आश्रम के लोग स्वयं ही करें। इसके लिए वह औज़ारों की एक सूची तैयार कर रहे थे। ताकि आश्रम में रहकर ही उसकी ज़रूरतों का सामान स्वयं बनाया जा सके, आश्रम व उसके लोग स्वयं की ज़रूरतों के लिए किसी कारीगर पर निर्भर ना रहें।

shaalaa.com
गद्य (Prose) (Class 7)
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 19: आश्रम का अनुमानित व्यय - लेखा जोखा [पृष्ठ १३९]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Vasant Part 2 Class 7
अध्याय 19 आश्रम का अनुमानित व्यय
लेखा जोखा | Q 1 | पृष्ठ १३९

संबंधित प्रश्न

 लेखक ने सिंधु और ब्रह्मपुत्र की क्या विशेषताएँ बताई हैं?


बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर

इस पाठ के लेखक कौन हैं?


बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर

दिव्या के शरीर के किस अंग से रक्त लिया गया?


लाल कण बनावट में कैसे होते हैं?


(क) द्रोपदी के पास एक 'अक्षयपात्र' था, जिसका भोजन समाप्त नहीं होता था। अगर तुम्हारे पास ऐसा ही एक पात्र हो, तो तुम क्या करोगे?

(ख) यदि ऐसा कोई पात्र तुम्हारे स्थान पर तुम्हारे मित्र के पास हो, तो तुम क्या करोगे?


नीचे लिखे शब्दों में सही अक्षर भरो-

वि______य


नीचे लिखे शब्दों में सही अक्षर भरो-

व ______


बार-बार नष्ट करने की कोशिशों के बाद भी किताबें समाप्त नहीं हुईं। क्यों?


तुम नीचे लिखे वाक्य को अपनी भाषा में कैसे कहोगे?

'पलक झपकते ही रहमत का चेहरा आनंद से खिल उठा।'


देखो, समझो और करो

(क) पहले खाने में घड़ा है।

(ख) तीसरे खाने में ______ है।

(ग) पाँचवे खाने में पगड़ी है।

(ङ) ______ खाने में कुर्ता है।

(च) नौंवे खाने में ______है।

(छ) ______ खाने में चूहा है।

(ज) दूसरे खाने में ______ है।

(झ) ______ खाने में ______ है। यह हमारा राष्ट्रीय पक्षी है।

(ञ) ______ खाने में ______ है। इसे चेहरे पर लगाते हैं।


आसपास की निर्जीव चीज़ों को ध्यान में रखकर कुछ संवाद लिखिए, जैसे-

• चॉक का ब्लैक बोर्ड से संवाद
• कलम का कॉपी से संवाद
• खिड़की का दरवाज़े से संवाद


लड़की के दिमाग में कौन-कौन से प्रश्न उठते हैं?


बिंबाणु (प्लेटलैट कण) की कमी किस बीमारी में पाई जाती है


बहुविकल्पी प्रश्न

माधवदास चिड़िया को किसका प्रलोभन दे रहे थे।


बहुविकल्पी प्रश्न

बगीचा में चिड़िया कहाँ आकर बैठी थी?


अप्पू के कंचे सड़क पर कैसे बिखर गए?


निबंध में आपने ये पंक्तियाँ पढ़ी हैं-मैं अपने शाल में लपेटकर उसे संगम ले गई। जब गंगा के बीच धार में उसे प्रवाहित किया गया तब उसके पंखों की चंद्रिकाओं से बिंबित प्रतिबिंबित होकर गंगा को चौड़ा पाट एक विशाल मयूर के समान तरंगित हो उठा।’ -इन पंक्तियों में एक भावचित्र है। इसके आधार पर कल्पना कीजिए और लिखिए मोर पंख की चंद्रिका और गंगा की लहरों में क्या-क्या समानताएँ लेखिका ने देखी होगी जिसके कारण गंगा का चौड़ा पाट एक विशाल मयूर पंख के समान तरंगित हो उठा।


विस्मयाभिभूत शब्द विस्मय और अभिभूत दो शब्दों के योग से बना है। इसमें विस्मय के य के साथ अभिभूत के अ के मिलने से या हो गया है। अ आदि वर्ण है। ये सभी वर्ण ध्वनियों में व्याप्त हैं। व्यंजन वर्गों में इसके योग को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जैसे क + अ = क इत्यादि। अ की मात्रा के चिह्न (ा) से आप परिचित हैं। अ की भाँति किसी शब्द में आ के भी जुड़ने से अकार की मात्रा ही लगती है, जैसे-मंडल + आकार = मंडलाकार। मंडल और आकार की संधि करने पर (जोड़ने पर) मंडलाकार शब्द बनता है और मंडलाकार शब्द का विग्रह करने पर (तोड़ने पर) मंडल और आकार दोनों अलग होते हैं। नीचे दिए गए शब्दों के संधि-विग्रह कीजिए

संधिविग्रह

नील + आभ = ______ सिंहासन = ______

नव + आगंतुक = ______ मेघाच्छन्न = ______


सन् 1857 में अगर आप 12 वर्ष के होते तो क्या करते? कल्पना करके लिखिए।


नीचे लिखा वाक्य पढ़ो। उसमें इस्तेमाल हुए मुहावरे को अपने ढंग से इस्तेमाल करके कुछ और वाक्य बनाओ।

बलदेव के तो होश उड़े हुए थे।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×