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गति विकसित करने की विधियों का विस्तार से वर्णन कीजिये।

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प्रश्न

गति विकसित करने की विधियों का विस्तार से वर्णन कीजिये।

विस्तार में उत्तर
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उत्तर

  1. एक्सेलरेशन रन: कम दूरी की स्प्रिंट (20–60 m) एक्सेलरेशन और शुरुआती गति को बढ़ाती हैं।
  2. इंटरवल ट्रेनिंग: बार-बार की जाने वाली ज़्यादा तीव्रता वाली दौड़, जिनके बीच में आराम का समय होता है, रिकवरी क्षमता और गति सहनशक्ति को बेहतर बनाती हैं।
  3. रिपीटिशन मेथड: जब अधिकतम प्रयास वाली स्प्रिंट को हर बार दोहराने के बीच पूरी तरह से आराम करके किया जाता है, तो शुद्ध गति बढ़ जाती है।
  4. रेसिस्टेंस ट्रेनिंग: रेसिस्टेंस (विरोध) के साथ दौड़ना जैसे कि स्लेज, पैराशूट और चढ़ाई पर दौड़ना स्प्रिंटिंग की शक्ति और ज़बरदस्त ताकत को बढ़ाता है। 
  5. प्लायोमेट्रिक एक्सरसाइज़: बॉक्स जंप, हॉपिंग और बाउंडिंग जैसी कूदने वाली एक्सरसाइज़ से तेज़-सिकुड़ने वाली मांसपेशियों की सक्रियता बढ़ जाती है।
  6. टेक्नीक ट्रेनिंग: दौड़ने की सही तकनीक का इस्तेमाल करके दक्षता और गति बढ़ाई जाती है; इस तकनीक में कदमों की लंबाई, हाथों की हरकत और शरीर की मुद्रा शामिल होती है।
  7. रिएक्शन टाइम ड्रिल: तेज़ शुरुआत वाली एक्सरसाइज़ के ज़रिए प्रतिक्रिया की गति को बेहतर बनाया जाता है; इन एक्सरसाइज़ में देखने या सुनने से जुड़े संकेतों का इस्तेमाल किया जाता है।
  8. फ्लेक्सिबिलिटी ट्रेनिंग: स्ट्रेचिंग करने से मांसपेशियों की फ्लेक्सिबिलिटी (लचीलापन) बढ़ जाती है, जिससे हरकतें ज़्यादा तेज़ और सहज हो पाती हैं।
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2025-2026 (March) Set 4

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