Advertisements
Advertisements
प्रश्न
निम्नलिखित विषय पर हिन्दी में निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो:
‘गाँवों में रहकर जीवन बिताना, शहरी जीवन की तुलना में, अधिक आनन्ददायक तथा आसान होता है।’ - इस विषय के विपक्ष में अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।
Advertisements
उत्तर
उपरोक्त कथन सुनने में भले ही आकर्षक प्रतीत होता हो, परंतु वास्तविकता इससे भिन्न है। सामान्य धारणा यह है कि ग्रामीण जीवन सुखद होता है, किंतु यह केवल एक कल्पना मात्र है। वस्तुतः ग्रामीण जीवन अभावों से भरा हुआ है, जहाँ जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में कमी ही कमी दिखाई देती है। चाहे किसी भी क्षेत्र को देखा जाए, वहाँ समस्याएँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। उदाहरणस्वरूप कुछ प्रमुख अभावों का उल्लेख करना उपयुक्त होगा।
सबसे पहले मानव जीवन की सुरक्षा की बात करें तो गाँवों में यह पूरी तरह असुरक्षित है। सुरक्षा के लिए न तो वहाँ थाने होते हैं और न ही पुलिस चौकियाँ। ग्रामीण लोग प्रायः निर्धन होते हैं और उनके पास अधिक धन-संपत्ति नहीं होती। यदि थोड़ी-बहुत संपत्ति जैसे पशुधन या कृषि भूमि हो भी, तो सुरक्षा के अभाव में उस पर कोई भी व्यक्ति अवैध रूप से कब्जा कर सकता है। यदि पीड़ित व्यक्ति शिकायत करता भी है, तो न्याय मिलने में जीवन भर लग जाता है और अंततः निराशा ही हाथ लगती है। अपराधी दिनदहाड़े अपराध कर लेते हैं और असहाय ग्रामीण ठगा-सा रह जाता है।
इसी प्रकार आधुनिक जीवन में यातायात जीवन का आधार बन चुका है, किंतु गाँवों में इसके पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। वहाँ राजमार्गों का अभाव है और आवागमन सुगम नहीं हो पाता। यदि कहीं जाना भी हो, तो कुछ घंटों के बजाय पूरा दिन लग जाता है। आकस्मिक परिस्थितियों में विलंब हो जाने पर व्यक्ति अपने गंतव्य तक पहुँच ही नहीं पाता। ऐसी स्थिति में यदि किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक बिगड़ जाए, तो परिवहन की कमी के कारण उसकी मृत्यु तक हो सकती है। गर्भवती महिलाओं के लिए तो चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में जीवन और भी अधिक संकट में पड़ जाता है।
इसके अतिरिक्त गाँवों में रोजगार के साधन भी नहीं होते। रोजगार की खोज में लोगों को नगरों की ओर पलायन करना पड़ता है। शिक्षा के क्षेत्र में भी गाँव पिछड़े हुए हैं। प्राथमिक शिक्षा के अतिरिक्त सामान्य और उच्च शिक्षा के लिए शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है। बड़े उद्योग, कारखाने, अच्छे अस्पताल, विद्यालय, प्रशिक्षण संस्थान, प्रशासनिक कार्यालय, विभागीय मुख्यालय, बड़े बाजार और उन्नत यातायात के साधन-ये सभी सुविधाएँ नगरों में ही केंद्रित हैं। आरामदायक जीवन के साधन जैसे फ्रिज, एसी आदि भी मुख्यतः शहरों में उपलब्ध हैं।
नगरों में चौड़ी सड़कें, चमकती दुकानें, आधुनिक वाहन, ऊँची बहुमंजिली इमारतें, तेज़ रफ्तार रेलगाड़ियाँ और आकाश को चीरते विमान दिखाई देते हैं, जबकि इसके विपरीत गाँव अंधकार में डूबा हुआ अपने आँसू बहाता प्रतीत होता है, जिसकी युवा पीढ़ी रोजगार की तलाश में नगरों की ओर पलायन कर चुकी है। गाँवों में कीचड़ से भरे रास्ते, टपकते हुए छप्पर और बरसात में रिसते घर दिखाई देते हैं। ऐसे ग्रामीण जीवन में सुख की खोज करने पर केवल निराशा ही प्राप्त होती है। वास्तव में सुख की कल्पना करना भी शेष जीवन को दुःखमय बना देने के समान है।
