हिंदी

“फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे।”

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

पाठ में से चुनकर पंक्ति नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए–

“फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते
करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे।”

विस्तार में उत्तर
Advertisements

उत्तर

इन पंक्तियों में कवि वर्षा ऋतु आने पर पक्षियों की खुशी का वर्णन करता है। गर्मी के दिनों में पपीहा (चातक पक्षी) तपती धूप से बहुत परेशान रहता है और वर्षा की बूँदों को तरसता रहता है। वर्षा आते ही उसका ग्रीष्म का ताप मिट जाता है और वह लाखों की संख्या में खुशी-खुशी इधर-उधर घूमने लगता है। उसी तरह सारे मोर भी वर्षा के बहुत प्रिय होते हैं। वे वन में अपने सुंदर पंख फैलाकर खुशी के नृत्य कर रहे हैं। इन पंक्तियों से हमें समझ आता है कि वर्षा का आनंद केवल मनुष्यों को नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों को भी मिलता है। वर्षा ऋतु सबके लिए बहार लेकर आती है।

shaalaa.com
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 7: वर्षा-बहार - पाठ से [पृष्ठ ८६]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Malhar Class 7
अध्याय 7 वर्षा-बहार
पाठ से | Q (क) | पृष्ठ ८६
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×