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प्रश्न
“एक स्टूडियो से दूसरे और तीसरे स्टूडियो के चक्कर में ही पूरा दिन बीत जाता था।”
सन् 1942 में अपने पिता की मृत्यु के बाद लता मंगेशकर ने अकेले अपनी माँ, छोटे भाई-बहनों की देखभाल की और अपने घर को सँभाला। उस समय उनकी आयु मात्र 13 वर्ष थी। तब महिलाओं का फिल्म में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था। उस समय सुबह से रात तक एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो भागते हुए लता जी के एक दिन की कल्पना कीजिए। इस भागदौड़ में वे किन-किन चुनौतियों का सामना करती होंगी?
(संकेत- भोजन, यात्रा-भाड़ा, सुरक्षा, थकान आदि)
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उत्तर
सन् 1942 में पिता की मृत्यु के बाद लता मंगेशकर जी पर परिवार की जिम्मेदारी आ गई थी। वे सुबह जल्दी उठकर घर का काम करती होंगी और फिर रिकॉर्डिंग के लिए स्टूडियो जाती होंगी। एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो जाने में उनका काफी समय और यात्रा-भाड़ा खर्च होता होगा। कई बार काम की व्यस्तता के कारण उन्हें समय पर भोजन भी नहीं मिल पाता होगा। देर रात घर लौटते समय अपनी सुरक्षा की चिंता भी रहती होगी। दिनभर काम करने से वे बहुत थक जाती होंगी। इतनी कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और मेहनत करके अपने परिवार का पालन-पोषण किया।
