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प्रश्न
‘एक फूल की चाह’ कविता के माध्यम से कवि सियारामशरण गुप्तजी ने छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीति पर कुठाराघात किया है। - सिद्ध कीजिए।
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उत्तर
गुप्तजी ने छुआछूत की बुराई को अपनी कविता "एक फूल की चाह" में उजागर किया है। छुआछूत भारतीय समाज में व्याप्त भ्रमों को उजागर करता है। इसमें एक दलित पिता का दर्द व्यक्त किया गया है। उसकी बेटी बीमार हो जाती है। उसके शरीर में ज्वर आने लगता है। ज्वर से उसका स्वर और शरीर कमजोर हो जाते हैं। पिता भी बेटी को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करता है।
एक दिन बेटी पिता से माँ को एक फूल देने के लिए कहती है। दलित पिता मंदिर नहीं जा सकता था। लेकिन वह अपनी बेटी की अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए देवी माँ के मंदिर से फूल ले जाता है। मंदिर में प्रवेश करने और पूजा का फूल लेने की मूर्खता के लिए लाचार पिता को बहुत पीटा जाता है। दलितों को अछूत बताकर उनका अपमान करना और उनके मंदिर में प्रवेश करने से उनका धर्म खराब हो जाएगा। कुएँ से पानी निकालने पर पानी गंदा हो जाएगा। गुप्तजी ने इस तरह की संकीर्ण मानसिकता को खारिज कर दिया है। ऐसे कठोर, क्रूर व्यवहार के कारण पिता अपनी बेटी की अंतिम इच्छा भी पूरी नहीं कर पाता।
जातिवाद सामाजिक अपराध है। दलितों को छुआछूत के नाम पर मंदिर में प्रवेश करने से रोकना मानवता पर हमला करने के समान है। हमारे देश का संविधान हर नागरिक को समानता का अधिकार देता है, इसलिए हमें उसका सम्मान करना चाहिए और उसके साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए।
