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'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! का प्रतीकार्थ समझाइए।

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प्रश्न

'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! का प्रतीकार्थ समझाइए।

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उत्तर

इस कथन का शाब्दिक अर्थ है कि इसी स्थान पर मेरी नाक की लौंग खो गई है, मैं किससे पूछुँ? परन्तु यदि दुलारी की मनोस्थिति देखें तो जिस स्थान पर उसे गाने के लिए आमंत्रित किया गया था, उसी स्थान पर टुन्नू की मृत्यु हुई थी तो उसका प्रतीकार्थ होगा - इसी स्थान पर मेरा प्रियतम मुझसे बिछड़ गया है। अब मैं किससे उसके बारे में पुछूँ कि मेरा प्रियतम मुझे कहाँ मिलेगा? अर्थात् अब उसका प्रियतम उससे बिछड़ गया है, उसे पाना अब उसके बस में नहीं है।

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एही ठैयाँ झुलनी हैरानी हो रामा!
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