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द्विदंतुर लिगन्ड से क्या तात्पर्य है?

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प्रश्न

द्विदंतुर लिगन्ड से क्या तात्पर्य है?

लघु उत्तरीय
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उत्तर

एक द्विदंतुर लिगन्ड, जिसे उभयदंती संलग्नी के नाम से भी जाना जाता है। एक लिगन्ड है जो दो दाता परमाणुओं का उपयोग करके धातु आयन के साथ समन्वय बंधन बना सकता है। ये दाता परमाणु आमतौर पर लिगन्ड की संरचना में परमाणुओं की एक विशिष्ट संख्या से अलग होते हैं, जिससे एक कीलेट संकुल बनता है।

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उपसहसंयोजन यौगिकों से संबंधित कुछ प्रमुख पारिभाषिक शब्द व उनकी परिभाषाएं
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अध्याय 5: उपसहसंयोजन यौगिक - अभ्यास [पृष्ठ १४२]

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एनसीईआरटी Rasayan bhag 1 aur 2 [Hindi] Class 12
अध्याय 5 उपसहसंयोजन यौगिक
अभ्यास | Q 5.4 2. a | पृष्ठ १४२

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दो उदाहरण देते हुए निम्नलिखित को समझाइए।

समन्वय समूह


निम्न संकुल में केंद्रीय धातु आयन की ऑक्सीकरण अवस्था, d-कक्षकों का अधिग्रहण एवं उपसहसंयोजन संख्या बतलाइए –

K3[Co(C2O4)3]


निम्न संकुल में केंद्रीय धातु आयन की ऑक्सीकरण अवस्था, d-कक्षकों का अधिग्रहण एवं उपसहसंयोजन संख्या बतलाइए –

cis-[CrCl2(en)2]Cl


निम्न संकुल में केंद्रीय धातु आयन की ऑक्सीकरण अवस्था, d-कक्षकों का अधिग्रहण एवं उपसहसंयोजन संख्या बतलाइए –

(NH4)2[CoF4]


कीलेशन द्वारा उपसहसंयोजन यौगिकों का स्थायित्व कीलेट प्रभाव कहलाता है। निम्नलिखित में से कौन-सी संकुल स्पीशीज़ सर्वाधिक स्थायी है?


अभिकथन: आविषी धातु आयन कीलेटी लिगंडों द्वारा निष्काषित किए जाते हैं।

तर्क: कीलेट संकुलों की प्रवृत्ति अधिक स्थायी होने की होती है।


दो उदाहरण देते हुए निम्नलिखित को समझाइए।

हेट्रोरोलेप्टिक


एकदंतुर लिगन्ड का दो उदाहरण दीजिए।


उभयदंतुर लिगन्ड से क्या तात्पर्य है?


उभयदंतुर लिगन्ड का दो उदाहरण दीजिए।


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