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प्रश्न
दुश्चिता को "पेट में तितलियों का होना" जैसे अनुभूति कहा जाता है। किस अवस्था में दुश्चिता विकार का रूप लेती है? इसके प्रकारो का वर्णन कीजिए।
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उत्तर
दुश्चिता का अनुभव तब होता है जब किसी परीक्षा की प्रतीक्षा कर रहे होते है या किसी दंत चिकित्स्क के पास जाना होता है या कोई एकल प्रदर्शन करना होता है। यह सामान्य है, जिसकी हमसे प्रत्यशा की जाती है। यहाँ तक की इससे हमें अपना कार्य अच्छी तरह करने की अभिप्रेरणा भी मिलती है। इसके विपरीत जब उच्च स्तरीय दुसिचंता जो कष्टप्रद होती है तथा हमारे सामान्य क्रियाकलापों में बाधा पहुंचाती है तब यह मनोवैज्ञानिक विकारो की सबसे सामान्य श्रेणी दुश्चिंता विकार की उपस्थिति का संकेत होती है।
प्रत्येक व्यक्ति को आकुलता और भय होते है। सामान्यतः दुश्चिता शब्द को भय और आशंक की विस्तृत, अस्पष्ट और अप्रीतिकर भावना के रूप में परिभाषा किया जाता है। दुश्चिता व्यक्ति में निम्न लक्षणो का सम्मिलित रूप रहता है, यथा - हृदयगति का तेज होना, सांस की कमी होना, भूख न लगना, बेहोशी, चक्क्र आना, पसीना आना, निद्रा की कमी, बार - बार मूत्र त्याग करना तथा कपकपी आना। दुश्चिता विकार के कई प्रकार होते है। सामान्यकृत दुश्चिता विकार, आतंक, सामाजिक दुश्चिता विकार, वियोगज दुश्चिता विकार, वियोगज दुश्चिता विकार आदि।
