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चर्चा कीजिए कि पुरातत्वविद किस प्रकार अतीत का पुनर्निर्माण करते हैं?

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प्रश्न

चर्चा कीजिए कि पुरातत्वविद किस प्रकार अतीत का पुनर्निर्माण करते हैं?

दीर्घउत्तर
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उत्तर

जैसा कि हम देखते हैं कि विद्वानों को हड़प्पा में पाई गई लिपियों को पढ़ने में सफलता नहीं मिली। ऐसे में पुरातत्वविदों के लिए पुरावस्तुएँ ही हड़प्पा संस्कृति के पुनर्निर्माण में सहायक रही हैं; जैसे-मिट्टी के बर्तन, औजार, आभूषण, धातु, मिट्टी और पत्थरों की घरेलू वस्तुएँ आदि। कुछ अजलनशील कपड़ा, चमड़ा, लकड़ी और रस्सी आदि लुप्त हो चुके हैं। कुछ चीजें ही बचीं हैं; जैसे–पत्थर, चिकनी मिट्टी, धातु और टेराकोटा आदि। यह बहुत महत्त्वपूर्ण है कि शिल्पियों द्वारा कार्य करते हुए कुछ प्रस्तर पिंड और अपूर्ण वस्तुओं को उत्पादन के स्थान पर काटते या बनाते समय फेंक दिया जाता था, जिन्हें पुन: निर्मित नहीं किया जा सकता था। यही पुरावस्तुएँ हमारे लिए उपयोगी साबित हुई हैं। नहीं तो हमें संस्कृति के महत्त्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी अधूरी ही प्राप्त होती।। पुरातत्वविदों ने उन्हीं पुरावस्तुओं के आधार पर मानव जाति के क्रमिक विकास को चिहनित किया है। उनका वर्गीकरण धातु, मिट्टी, पत्थर, हड्डियों आदि में किया गया है।

पुरातत्वविदों ने दूसरा महत्त्वपूर्ण प्रभाव मौसम और उन तत्कालीन कारणों को माना जो उन्हें आभूषणों और औज़ारों आदि पर दिखाई दिए। पुरातत्वविद पुरा वस्तुओं की पहचान एक विशेष प्रकार की प्रक्रिया द्वारा करते हैं। जैसे किसी संस्कृति विशेष में रहने वाले लोगों के बीच क्या सामाजिक और आर्थिक भिन्नताएँ थीं। जैसे हड़प्पा सभ्यता कालीन मिस्र के पिरामिडों में कुछ राजकीय शवाधान प्राप्त हुए, जहाँ बहुत बड़ी मात्रा में धन-संपत्ति दफनाई गई थी। पुरातत्वविदों ने कुछ घटनाओं को अनुमानित भी किया है। उदाहरणस्वरूप पुरातत्वविदों ने हड़प्पाई धर्म को अनुमान के आधार पर आँका है। अर्थात् कुछ विद्वान वर्तमान से अतीत की ओर बढ़ते हैं। कुछ नीतियाँ पात्रों के संबंध में और पत्थर की चक्कियों के बारे में युक्तिसंगत रही हैं तो कुछ धार्मिक प्रतीकों के संबंध में शंकाग्रस्त रहीं; जैसे-कई मुहरों पर रुद्र के चित्र अंकित हैं। पुरावस्तुओं की उपयोगिता की समझ हम आधुनिक समय में प्रयुक्त वस्तुओं से उनकी समानता के आधार पर ही लगाते हैं।

उदाहरणस्वरूप कुछ हड़प्पा स्थलों पर मिले कपास के टुकड़ों के विषय में जानने के लिए हमें अप्रत्यक्ष साक्ष्यों जैसे मूर्तियों के चित्रण पर निर्भर रहना पड़ता है तथा कुछ वस्तुएँ पुरातत्वविदों को अपरिचित लगीं तो उन्होंने उन्हें धार्मिक महत्त्व की समझ ली। कुछ मुहरों पर भी अनुष्ठान के दृश्य, पेड़-पौधे अर्थात् प्रकृति की पूजा के संकेत मिलते हैं तथा पत्थर की शंक्वाकार वस्तुओं को लिंग के रूप में दर्शाया गया है। पुरातत्त्वविदों ने कोटदीजी सिंधु नदी के तट पर 39 फीट नीचे मानव जीवनवृत्ति के अवशेष प्राप्त किए हैं। कौशांबी के निकट चावल और हड़प्पाकालीन मिट्टी के बर्तन मिले हैं। लोथल से बाँट, चूड़ियाँ और पत्थर के आभूषण भी प्राप्त हुए हैं। काले और लाल रंग की मिट्टी के बर्तन, आकृतियाँ और अवशेष मिले हैं। पुरातत्वविदों ने विभिन्न वैज्ञानिकों की मदद से मोहनजोदड़ो और हड़प्पा पर कार्य किए हैं। कई अन्वेषण, व्याख्या और विश्लेषण से निष्कर्ष निकाले हैं, जिनमें कुछ असफल भी रहे।

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अतीत को जोड़कर पूरा करने की समस्याएँ
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अध्याय 1: ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ - अभ्यास [पृष्ठ २७]

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एनसीईआरटी Itihas Bhag 1, 2 aur 3 [Hindi] Class 12
अध्याय 1 ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ
अभ्यास | Q 8. | पृष्ठ २७
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