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“चित्त में चैन” न पा सकने का मुख्य कारण क्या है?

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प्रश्न

“चित्त में चैन” न पा सकने का मुख्य कारण क्या है?

विकल्प

  • प्रयास करने पर भी टाला न जा सकने वाला दुख

  • बिना सोचे-समझे किए गए कार्य की असफलता

  • खान-पान, सम्मान और राग-रंग का अभाव

  • दुनिया द्वारा की जाने वाली निंदा और उपहास

MCQ
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उत्तर

बिना सोचे-समझे किए गए कार्य की असफलता

स्पष्टीकरण:

चित्त में चैन न पा सकने का मुख्य कारण बिना सोचे-समझे किए गए कार्य की असफलता है। कवि कहता है; “जग में होत हँसाय चित्त में चैन न पावै” तथा “खटकत है जिय माहिं कियो जो बिना बिचारे॥” अर्थात् बिना विचारे किया गया काम बिगड़ जाता है, जिससे व्यक्ति जग में हँसाया जाता है और वही काम उसके जी (मन) में खटकता रहता है। इसीलिए उसके चित्त को चैन नहीं मिलता और खान-पान, सन्मान तथा राग-रंग भी उसके मन को भाते नहीं।

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अध्याय 6: गिरिधर कविराय की कुंडलिया - पाठ से [पृष्ठ ७४]

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एनसीईआरटी Hindi Malhar Class 7
अध्याय 6 गिरिधर कविराय की कुंडलिया
पाठ से | Q (क) (2) | पृष्ठ ७४
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